पेपर लीक पर बॉम्बे हाईकोर्ट फैसला सांकोतिक फोटो सोर्स-सोशल माडिया
मुंबई

पेपर लीक पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: परीक्षा धांधली मामलों के लिए 25 फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन

Bombay High Court: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए महाराष्ट्र में 25 विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया है।

रूपम सिंह

Maharashtra NEET Paper Leak Fast Track Courts: प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसे मामलों पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है।

हाईकोर्ट ने नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी और अन्य परीक्षाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए महाराष्ट्र में 25 विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया है। इन अदालतों का उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों का शीघ्र निपटारा करना और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

इन कानूनों के तहत चलेगा ट्रायल

हाईकोर्ट द्वारा गठित विशेष अदालतें परीक्षा में अनुचित साधनों और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी। इन मामलों का ट्रायल मुख्य रूप से लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के संबंधित प्रावधानों तथा महाराष्ट्र विश्वविद्यालय, बोर्ड और अन्य निर्दिष्ट परीक्षा अनुचित साधन निवारण अधिनियम, 1982 के तहत किया जाएगा। इससे विभिन्न कानूनों के अंतर्गत दर्ज मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।

कई जिलों में विशेष न्यायाधीशों की नियुक्ति

हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न जिलों और शहरों में न्यायिक अधिकारियों को विशेष न्यायाधीश के रूप में नामित किया है। इनमें मुंबई शहर के सिटी सिविल कोर्ट और विक्रोली के अलावा पुणे, ठाणे, नाशिक, कोल्हापुर, बीड़, चंद्रपुर और धुले शामिल हैं। इन अदालतों में परीक्षा गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी।

इन जिलों को भी किया गया शामिल

विशेष अदालतों की सूची में , गोंदिया, जलगांव, जालना, उस्मानाबाद, परभणी, सांगली, सातारा, सोलापुर, वर्धा, यवतमाल, वाशिम और नंदुरबार जैसे जिले भी शामिल हैं। इन जिलों में तैनात विशेष न्यायाधीश परीक्षा संबंधी मामलों की सुनवाई करेंगे, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों के मामलों का भी तेजी से निपटारा संभव हो सकेगा।

परीक्षा प्रणाली में बढ़ेगा भरोसा

विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन को परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मामलों के त्वरित निस्तारण से परीक्षा में अनियमितता करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही अभ्यर्थियों का प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर विश्वास भी और मजबूत होगा।

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