मुंबई महानगरपालिका (सोर्सः सोशल मीडिया)
मुंबई

BMC पर ₹2.34 लाख करोड़ की देनदारी, ग्रीन बॉन्ड से ₹10,000 करोड़ जुटाने की तैयारी

BMC Debt 2026: मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर ₹2.34 लाख करोड़ की देनदारी के बीच ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड से ₹5,000 से ₹10,000 करोड़ जुटाने की तैयारी है।

आंचल लोखंडे

Highlights:

  • रिपोर्ट के अनुसार, बीएमसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के चलते भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही है।

  • ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए बाजार से ₹5,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ जुटाने की योजना है।

  • बीएमसी ने डिबेंचर ट्रस्टी की नियुक्ति के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट आमंत्रित किया है।

BMC Green Municipal Bonds: एशिया की सबसे अमीर महानगरपालिका बीएमसी की आर्थिक हालत खस्ता नजर आ रही है। बीएमसी अपनी बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के कारण 2.34 लाख करोड़ के भारी कर्ज के दबाव से जूझ रही है। इन परियोजनाओं का आकार बीएमसी के वर्ष 2026-27 के वार्षिक बजट से ढाई गुना अधिक है।

गौरतलब है कि बीएमसी को इस वर्ष अपने वित्तीय कोष में 3,544 करोड़ का नुकसान भी दर्ज करना पड़ा था। आर्थिक तंगी को देखते हुए बीएमसी ने बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मनपा ग्रीन म्युनिसिपल बॉन्ड जारी कर बाजार से 5,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपए तक जुटाने की योजना बना रही है।

BMC की आर्थिक स्थिति पर सियासी घमासान

इसके लिए बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए मनपा ने डिबेंचर ट्रस्टी की नियुक्ति के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) आमंत्रित किए हैं। बॉन्ड से प्राप्त रकम का इस्तेमाल पर्यावरण संरक्षण, गंदे पानी के शोधन और शहर की जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर किया जाएगा। इस राशि को निर्धारित परियोजनाओं पर ही खर्च करना होगा।

निवेशकों के हितों की निगरानी करेगा स्वतंत्र ट्रस्टी

बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया में डिबेंचर ट्रस्टी की अहम भूमिका होती है। यह एक स्वतंत्र वित्तीय संस्था होती है, जो निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बॉन्ड से जुड़ी शर्तों के पालन पर नजर रखती है। बीएमसी ने इस व्यवस्था के तहत ट्रस्टी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मनपा के एक अधिकारी के अनुसार, बॉन्ड की क्रेडिट रेटिंग का आकलन करने के लिए एजेंसी का चयन किया जा चुका है।

15 वर्षों तक लिक्विडिटी सुरक्षा सुनिश्चित

इसके अलावा बॉन्ड जारी करने के लिए बैंकों का चयन भी पूरा कर लिया गया है। एक अन्य एजेंसी बॉन्ड जारी करने से संबंधित पूरी प्रक्रिया का प्रबंधन करेगी। साथ ही, निवेशकों की रकम के प्रबंधन और अगले 15 वर्षों तक लिक्विडिटी सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था भी की जाएगी। ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से जुटाई जाने वाली रकम शहर की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में लगाई जाएगी।

केंद्र सरकार की प्रोत्साहन योजना से भी उम्मीद

केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए पूंजी जुटाने को प्रोत्साहित करने की घोषणा की थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, 1,000 करोड़ रुपए के एकल म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करने पर 100 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे स्थानीय निकायों को बाजार से धन जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। बीएमसी ने भी अप्रैल में अपनी क्रेडिट रेटिंग का आकलन करने के लिए सेबी-पंजीकृत एजेंसी नियुक्त की थी। बाजार में बॉन्ड जारी करने से पहले क्रेडिट रेटिंग महत्वपूर्ण मानी जाती है।

बॉन्ड जारी करने के लिए बैंकों का चयन पूरा

इनमें धारावी, वर्सोवा, भांडुप, घाटकोपर, बांद्रा और मालाड में प्रस्तावित वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट शामिल हैं। इसके अलावा समुद्र के पानी को पीने योग्य बनाने के लिए डिसैलिनेशन प्लांट, दो जल सुरंगों और प्रस्तावित गारगाई बांध परियोजना के लिए भी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मुंबई की जलापूर्ति क्षमता बढ़ाने और अपशिष्ट जल के बेहतर प्रबंधन में मदद करना है।

ग्रीन बॉन्ड पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने

स्टैंडिंग समिति सदस्य जमीर कुरैशी ने कहा कि बृहन्मुंबई कंस्ट्रक्शन कंपनी बन गई है। बीएमसी 2 लाख करोड़ से ऊपर बीएमसी का लाइबिलिटी है। बीएमसी इंफ्रा प्रोजेक्ट में 48 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। कोस्टल रोड जैसे प्रोजेक्ट गरीब जनता इस्तेमाल नहीं करेगी। मध्यम वर्ग परिवार को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य चाहिए जो बीएमसी मुहैया कराने में असफल है। पानी का बिल हम वसूल नहीं पा रहे है, फोटोपास का पैसा नहीं आ रहा है और खर्च वहां किया जा रहा है जहां से कोई रिटर्न नहीं।

ग्रीन बांड जारी करना कोई गलत कदम नहीं: खणकर

बीएमसी सदन नेता गणेश खणकर ने कहा कि ग्रीन बांड जारी करना कोई गलत कदम नहीं है, इसका अर्थ यह नहीं है कि बीएमसी की आर्थिक स्थिति खस्ता है। केंद्र सरकार देश के सभी नगर निगम को ग्रीन बाड जारी करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। आरोप लग रहे है कि बीएमसी के पास सैलरी देने के पैसे नहीं है। यह तथ्यहीन है और अफवाह फैलाई जा रही है।

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