Technical Faults Safety Penalty Rules: बेस्ट की खराब हो रही वेट-लीज बसों को चालक चलाने को मजबूर हैं। इन बसों में ब्रेक, क्लच और स्टीयरिंग में खराबी जैसी तकनीकी खामियों की शिकायतें सामने आ रही हैं।
बुधवार को आयोजित बेस्ट समिति की बैठक में सदस्यों ने आरोप लगाया कि चालकों पर वेट-लीज बसों को 180 किमी तक सड़कों पर दौड़ाने का लक्ष्य पूरा करने का दबाव डाला जा रहा है। ऐसा करने से इनकार करने पर निजी ठेकेदारों की ओर से धमकी, वेतन कटौती और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
इसी के साथ ही खराब बसों को चलाने से यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। सदस्यों ने कहा कि तकनीकी खराबी की जानकारी देने के बाद भी उन्हें बसें सड़क पर उतारने के लिए मजबूर किया जाता है।
बेस्ट समिति सदस्य डॉ. नितिन नांदगांवकर ने बैठक में पेनल्टी व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनके अनुसार मरम्मत के लिए गैरेज में खड़ी बस पर बेस्ट ठेकेदार पर पांच हजार रुपए की पेनल्टी लगाता है। इसके अलावा 180 किलोमीटर का दैनिक लक्ष्य पूरा नहीं होने से ठेकेदार को राजस्व का नुकसान होता है।
नांदगांवकर ने आरोप लगाया कि कुछ ऑपरेटर खराब बसों को ‘मरम्मत पूरी’ दिखाकर जल्द ही सड़क पर उतार देते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब चालक खराबी के कारण केवल 120 या 130 किलोमीटर बस चला पाते हैं, तो ठेकेदारों को पूरे 180 किलोमीटर का भुगतान क्यों किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि चालकों पर स्थानांतरण और प्रतिकूल ड्यूटी लगाने की धमकी देने के भी आरोप हैं। उनके अनुसार, मौजूदा 1 हजार से 3 हजार रुपए तक की पेनल्टी ठेकेदारों के लिए पर्याप्त नहीं है। इन शिकायतों के बाद बेस्ट प्रशासन ने ठेका और पेनल्टी व्यवस्था में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की है।
बेस्ट महाप्रबंधक सोनिया सेठी ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे गंभीर हैं। ठेका में संशोधन कर न्यूनतम पेनल्टी बढ़ाई जाएगी और बेस्ट बसों की मरम्मत के लिए अनिवार्य समयसीमा तय की जाएगी। बेस्ट समिति की अध्यक्ष तृष्णा विश्वासराव ने भी कहा कि उठाई गई शिकायतें गंभीर हैं।
उनका सवाल उठाया कि जो किलोमीटर बसों ने वास्तव में तय ही नहीं किए, उनके लिए बेस्ट भुगतान क्यों करे। उन्होंने ठेका में तत्काल संशोधन के निर्देश दिए गए हैं। पेनल्टी पांच हजार रुपए से भी अधिक बढ़ाने और चिन्हित तकनीकी खराबियों को अधिकतम एक सप्ताह में दूर करने की समयसीमा तय करने की प्रक्रिया चल रही है।
सेवानिवृत्ति के बाद देय राशि के भुगतान में देरी पर ब्याज देने के मुद्दे को लेकर बेस्ट समिति की बैठक में बुधवार को चर्चा हुई। समिति सदस्य अजय सिंह ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए 1 मई 2024 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को भी विलंबित ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति देय राशि पर ब्याज देने की मांग उठाई।
अजय सिंह ने इस कटऑफ को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा कि 1 मई 2024 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी पर ब्याज का लाभ मिलना चाहिए। इस पर बेस्ट के महाप्रबंधक ने आश्वासन दिया कि महाराष्ट्र सरकार के अध्ययन समूह की गुरुवार को होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।