Contract Buses Increase In Mumbai: मुंबई की दूसरी लाइफलाइन मानी जाने वाली बेस्ट की अपनी बसों का बेड़ा तेजी से सिमट रहा है। कुछ वर्ष पहले 3,902 स्वामित्व वाली बसों का संचालन करने वाली बेस्ट के पास अब केवल 249 अपनी बसें ही बची हैं।
इनमें भी 224 ही यात्री सेवा में हैं, जबकि 25 टाटा हायब्रीड बसें धारावी डिपो में पिछले दो वर्षों से बंद पड़ी हैं। इसके उलट ठेके पर चलने वाली बसों की संख्या बढ़कर 2,532 हो गई है। इससे बेस्ट की निजी बसों पर बढ़ती निर्भरता और मुंबईकरों की परिवहन व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
मुंबईकरों के लिए लंबे समय से किफायती और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का प्रमुख साधन रही बेस्ट अब आर्थिक संकट से जूझ रही है। बढ़ते कर्ज और वित्तीय दबाव के बीच बेस्ट ने अपनी बसें खरीदने के बजाय ठेके पर बसें चलाने पर अधिक जोर दिया है।
इसका असर यात्रियों की संख्या और दैनिक आय पर भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2016 में बेस्ट की बसों से प्रतिदिन करीब 27.53 लाख यात्री सफर करते थे, जिससे लगभग 3.37 करोड़ रुपये की दैनिक आय होती थी। हालांकि, जून 2026 तक यात्रियों की संख्या घटकर 18.36 लाख रह गई।
इसी अवधि में बेस्ट बसों की दैनिक आय भी घटकर करीब 2.32 करोड़ रुपये हो गई। यानी दस वर्षों में प्रतिदिन बस सेवा का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों की संख्या में 9.17 लाख की कमी आई है, जो करीब 33 प्रतिशत है। यात्रियों और आय में गिरावट ने बेस्ट की आर्थिक स्थिति तथा भविष्य की परिवहन व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
मुंबई शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की अहम कड़ी बेस्ट के अपने बस बेड़े में पिछले दस वर्षों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2016 में बेस्ट के पास कुल 3,902 स्वामित्व वाली बसें थीं, जिनके जरिए शहर के विभिन्न हिस्सों में यात्रियों को नियमित बस सेवा उपलब्ध कराई जाती थी।
हालांकि, वर्ष 2026 तक बेस्ट की अपनी बसों की संख्या घटकर महज 249 रह गई है। यानी दस वर्षों के दौरान बेस्ट के स्वामित्व वाले बस बेड़े में 3,653 बसों की कमी आई है। यह कुल बेड़े में करीब 93.6 प्रतिशत की भारी गिरावट है। अपनी बसों की संख्या में इतनी बड़ी कमी के कारण बेस्ट की ठेके पर संचालित बसों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है।