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मुंबई राजस्थान परिवहन सेवा संघर्ष समिति ने ट्रेन संख्या 20177/20178 का विस्तार असारवा से कोलकाता तक करने का प्रस्ताव रखा है।
समिति के अध्यक्ष मोहनलाल जैन कावा ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
प्रस्तावित मार्ग में डूंगरपुर, जयसमंद रोड, उदयपुर, आगरा कैंट, इटावा और पारसनाथ को शामिल करने की मांग की गई है।
Mumbai Rajasthan Transport Service Sangharsh Samiti: मुंबई राजस्थान परिवहन सेवा संघर्ष समिति ने ट्रेन संख्या 20177/20178 असारवा जयपुर/दिल्ली मार्ग का विस्तार असारवा से डूंगरपुर, जयसमंद रोड, उदयपुर, आगरा कैंट, इटावा, पारसनाथ होते हुए कोलकाता तक करने की मांग उठाई है। इस संबंध में समिति के संयोजक व अध्यक्ष मोहनलाल जैन कावा ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है।
पत्र में उदयपुर के सांसद मन्नालाल रावत से भी इस मांग को आगे बढ़ाने की अपील की गई है। समिति का कहना है कि मेवाड़, वागड़, मारवाड़ और मेवल क्षेत्र के यात्रियों को लंबे समय से बेहतर रेल सुविधा की जरूरत महसूस हो रही है। प्रस्तावित विस्तार से राजस्थान के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के यात्रियों को भी सीधी रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है।
समिति ने पत्र में कहा है कि प्रस्तावित रेल मार्ग धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इससे सम्मेद शिखरजी जैसे विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थ स्थल की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सकती है। पारसनाथ क्षेत्र तक पहुंच आसान होने से विभिन्न राज्यों से आने वाले यात्रियों को लाभ होगा।
मोहनलाल जैन कावा के मुताबिक वर्तमान में इस क्षेत्र के यात्रियों को लंबी दूरी तय करने, अधिक खर्च और यात्रा के दौरान असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। ट्रेन का विस्तार होने से आवागमन आसान हो सकता है। इससे क्षेत्र के व्यापार, शिक्षा, रोजगार व पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
समिति ने रेलवे से मांग की है कि प्रस्तावित ट्रेन विस्तार की व्यवहारिकता का आकलन कर यात्रियों की जरूरतों के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएं। इसके लिए संबंधित रेलवे मंडलों के बीच समन्वय स्थापित कर मार्ग, ठहराव और परिचालन संबंधी संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
समिति का मानना है कि बेहतर रेल संपर्क से राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को देश के प्रमुख शहरों तक पहुंचने के लिए अधिक सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। साथ ही, लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को समय और खर्च की बचत हो सकती है तथा विभिन्न राज्यों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है।