रिश्वतखोरी (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

Mumbai: कोर्ट की टॉयलेट में रिश्वत की डील, न्यायपालिका की साख पर फिर सवाल

Bombay Court में क्लर्क के 15 लाख की रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तारी से न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं। जज के नाम पर वसूली की मांग ने व्यवस्था को हिला दिया है।

अपूर्वा नायक

Bribe In Court Toilet: अदालत में पक्ष में फैसला सुनाने के लिए 15 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार क्लर्क चंद्रकांत वासुदेव को विशेष अदालत ने दो हफ़्ते को मजिस्ट्रेट हिरासत में भेज दिया है।

जांच में एक और चौंका देने वाली बात सामने आयी है कि फैसला सुनाने के ठीक कुछ समय पहले न्यायाधीश ने एक ब्रेक लिया था और उस समय शिकायतकर्ता शौचालय गया था।

जहां क्लर्क चंद्रकांत वासुदेव ने उससे मुलाकात की और कहा की वासुदेव ने कथित तौर पर उससे कहा, 'साहेब के लिए कुछ तो करो, ऑर्डर तुम्हारे पक्ष में होगा।

इस पर प्रसिद्ध मुहावरा सटीक बैठता है की 'फैसला बिकता है बोलो खरीदोगे' इस खबर ने उन पीड़ितों को मायूस कर दिया है, जिन्हें प्रशासन से मायूसी मिलने के बाद अदालत से इंसाफ की उम्मीद थी।

चेंबूर से उरण आवास तक एक टैक्सी बुक की जाए

उस समय वासुदेव ने अपना फोन नंबर सहयोगी को दिया और उसे अपने नियोक्त्ता, मामले में शिकायतकर्ता को देने के लिए कहा था। शिकायतकर्ता ने क्लर्क को व्हाट्सप्प पर कॉल किया और क्लर्क ने उसे मिलने के लिए कहा था।

वे चेंबूर के एक कैफे में मिले, जहां क्लर्क ने कथित तौर पर 25 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। यह दावा करते हुए कि 10 लाख रुपये उसके लिए और 15 लाख रुपये जज के लिए है।

बैठक के बाद वासुदेव ने कथित तौर पर मांग की कि उनके लिए चेंबूर से नवी मुंबई के उरुण स्थित उनके आवास एक एक टैक्सी बुक की जाए, ताकि वो घर जा सके। आरोपी ने शिकायतकर्ता के सहयोगी को व्हाट्सप्प पर कॉल किया और कहा कि अगर रिश्वत नहीं दी गई, ती मामले में उनके खिलाफ आदेश पारित किया जाएगा।

ज्यूडिशियरी कभी पूरी तरह स्वतंत्र या भ्रष्टाचार मुक्त नहीं रही, लेकिन पहले के मुकाबले अब लोगों का अदालतों से भरोसा बहुत हद तक उठ चुका है। क्योंकि अब लगने लगा है कि अदालत में भी इंसाफ भी बिकने लगा है।

- बी जी कोलसे पाटिल, पूर्व न्यायाधीश

अदालत को न्याय का मंदिर और न्यायाधीशों को भगवान का रूप मानते हैं, यदि इस पवित्र स्थान पर फैसले बिकने लगे, तो आम जनता का न्यायपालिका से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा। फिर लोग न्याय के लिए कहां जाएंगे? न्यायपालिका की अखंडता हमारी न्याय प्रणाली की रीढ़ है। इसे कमजोर करने का कोई भी प्रयास सर्वथा अस्वीकार्य है।

- लूसी मेसी, एडवोकेट हाई कोर्ट

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