सोलार पैनल की फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में सोलर कनेक्शन बढ़ने के बावजूद बिजली की खपत में कमी नहीं, आखिर क्यों नहीं दिख रहा योजना का असर?

Maharashtra Solar Energy Consumption: महाराष्ट्र में सोलर कनेक्शन और रूफटॉप सोलर योजनाओं के रिकॉर्ड विस्तार के बावजूद बिजली की खपत क्यों बढ़ रही है? जानिए इसके चौंकाने वाले आंकड़े और मुख्य कारण।

गोरक्ष पोफली

Highlights

  • राज्य में सोलर कनेक्शन और रूफटॉप का हुआ रिकॉर्ड विस्तार।

  • इसके बावजूद महाराष्ट्र में बिजली की कुल खपत बढ़ रही है।

  • औद्योगिक मांग और रिबाउंड इफेक्ट के कारण खपत कम नहीं हो रही।

Electricity Usage Increasing With Solar Maharashtra: महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना (PMSGY) और सौर कृषि वाहिनी (MSKVY 2.0) के तहत सौर ऊर्जा कनेक्शनों का रिकॉर्ड विस्तार हुआ है। राज्य में 8.70 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो चुके हैं और 4.17 लाख से अधिक उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य तक पहुंच गया है।

इसके बावजूद, सरकारी आंकड़े एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं राज्य में ग्रिड बिजली की कुल मांग और खपत कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है।

आंकड़ों का विरोधाभास- सोलर बढ़ा, पर खपत भी बढ़ी

महाराष्ट्र आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 और महावितरण के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बिजली की कुल खपत और घरेलू मांग में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

  • कुल बिजली खपत में उछाल: वित्त वर्ष 2022-23 में राज्य की कुल बिजली खपत 1,50,764 मिलियन यूनिट थी, जो 2023-24 में बढ़कर 1,62,054 MU और 2024-25 में 1,66,224 MU तक पहुंच गई। यानी एक साल में 4,170 MU मतलब 2.57% की शुद्ध वृद्धि हुई।

  • घरेलू क्षेत्र की खपत में बढ़ोतरी: जिस घरेलू क्षेत्र को सोलर योजना से सबसे अधिक बिजली बचाने वाला माना जा रहा था, उसकी खपत 2022-23 में 32,773 MU से बढ़कर 2024-25 में 37,211 MU हो गई, जो लगभग 6.5% की सालाना वृद्धि दर्शाती है।

  • पीक पॉवर डिमांड: अप्रैल 2025 में पीक डिमांड 26,012 MW थी, जो अप्रैल 2026 में 26,744 MW और अगस्त 2026 में 29,497 MW के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

कुल बिजली खपत में वृद्धी का चार्ट

क्यों नहीं दिख रहा योजना का असर?

महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक राज्य है। राज्य की कुल बिजली खपत में औद्योगिक क्षेत्र की हिस्सेदारी सबसे अधिक 39.4% (65,459 MU) है, जबकि कृषि क्षेत्र 23.1% (38,428 MU) खपत करता है। घरेलू क्षेत्र का हिस्सा केवल 22.4% (37,211 MU) है। इसलिए, लाखों घरों में सोलर पैनल लगने के बावजूद उद्योगों और कारखानों की बढ़ती मांग पूरे राज्य के खपत आंकड़ों पर हावी रहती है।

क्षेत्रवार हिस्सेदारी का चार्ट

व्यवहारिक बदलाव और रिबाउंड इफेक्ट

रूफटॉप सोलर लगाने के बाद कई उपभोक्ता यह मान लेते हैं कि उनकी बिजली फ्री हो गई है। इसके परिणामस्वरूप घरों में AC का अधिक इस्तेमाल, नए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, इंडक्शन कुकिंग और EV चार्जिंग का प्रयोग बढ़ जाता है। जब घरेलू खपत सोलर उत्पादन क्षमता को पार कर जाती है, तो अतिरिक्त बिजली ग्रिड से ही ली जाती है।

सोलर आवर्स बनाम पीक टाइम का मिसमैच होना

सोलर पैनल केवल दिन में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच बिजली बनाते हैं। इसके विपरीत, घरेलू और व्यावसायिक क्षेत्रों में बिजली की सर्वाधिक मांग शाम 5 बजे से आधी रात के दौरान होती है। बैटरी स्टोरेज के बिना दिन की सौर ऊर्जा रात के पीक लोड को पूरी तरह विस्थापित नहीं कर पाती।

MERC के नए बैंकिंग व टाइमऑफडे नियम

महाराष्ट्र राज्य विद्युत नियामक आयोग (MERC) के संशोधित नियमों के तहत कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं के लिए सेमस्लॉट बैंकिंग अनिवार्य कर दी गई है। दिन की सस्ती सोलर बिजली से रात की महंगी पीकअवर बिजली के बिल का समायोजन सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा शाम के समय उपभोक्ताओं को 20% प्रीमियम दर पर ग्रिड बिजली खरीदनी पड़ती है।

कृषि क्षेत्र में ऑफग्रिड सोलर पंपों का उपयोग

महाराष्ट्र राज्य में 10 लाख से अधिक ऑफग्रिड सोलर पंप लगाए गए हैं। दिन में असीमित और मुफ्त सौर बिजली मिलने के कारण जल निष्कर्षण बढ़ गया है, जिससे नई सिंचाई मांग पैदा हुई है। ऑफग्रिड पंपों से उत्पन्न ऊर्जा ग्रिड में फीड नहीं होती, जिससे ग्रिड की पारम्परिक खपत में सीधी कटौती दर्ज नहीं होती।

व्यक्तिगत राहत बनाम राज्य स्तरीय मांग

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना विफल नहीं है यह व्यक्तिगत परिवारों को आर्थिक राहत देने और 4.17 लाख परिवारों का बिजली बिल शून्य करने में बेहद सफल रही है। हालांकि, व्यक्तिगत बिल में कमी होना और पूरे राज्य की ग्रिड खपत कम होना दो अलगअलग बातें हैं।

राज्य की तेज आर्थिक प्रगति, शहरीकरण और उद्योगों की बढ़ती जरूरतों के कारण राज्य स्तर पर कुल बिजली मांग में वृद्धि जारी है। इस चुनौती से निपटने के लिए महाराष्ट्र की रिन्यूएबल ऊर्जा नीति 2025-2035 के तहत बैटरी एनर्जी स्टोरेज और सौर कृषि वाहिनी (MSKVY 2.0) पर जोर दिया जा रहा है ताकि दिन की सौर ऊर्जा को स्टोर करके रात के पीक लोड को भी स्वच्छ ऊर्जा से बदला जा सके।

महाराष्ट्र के येवला से बांग्लादेश पहुंचा शीरे का माल, मध्य रेल को मिला 1.11 करोड़ रुपये का राजस्व

जामिया में छात्र संघ चुनाव को लेकर क्यों गरमाया माहौल? विरोध के बाद ऑफलाइन पढ़ाई ठप, ऑनलाइन क्लास शुरू

CJP Tiranga March: अभिजीत दीपके-नेहा बोरा पुलिस हिरासत में, कनॉट प्लेस में कॉकरोचों ने लहराया तिरंगा

नेहा बोरा का ऐलान: नहीं भरेंगी पीस बॉन्ड, प्रदर्शन को बताया लोकतांत्रिक अधिकार; कानूनी लड़ाई रखेंगी जारी

जयपुर में भीषण सड़क हादसा, नासिक के 3 श्रद्धालुओं की मौत; 7 घायल, एक्शन में गिरीश महाजन