Maharashtra Leads India FDI Inflow: 1991 के आर्थिक सुधारों का असर उनसे आए विदेशी निवेश के मामले में एक अलग-अलग तस्वीर दिखाता है, जिसमें सिर्फ कुछ ही राज्यों को ज्यादातर पैसा मिला है।
जनवरी 2000 से मार्च 2026 तक भारत में हुए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) इक्विटी इनफ्लो का लगभग 82 प्रतिशत सिर्फ छह राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों क्रमशः महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश (तेलंगाना सहित) में गया।
जब भारत ने एफडीआई और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (एफपीआई) के लिए दरवाजे खोले, तो देश को कम कैपिटल फॉर्मेशन का सामना करना पड़ा।
सेक्टर्स में जनवरी 2000 से दिसंबर 2025 तक ग्रॉस एफडीआई इक्विटी इनफ्लो में सर्विसेज का हिस्सा सबसे ज्यादा 16.37% था। इसके बाद कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर (15.62%) और ट्रेडिंग (6.55%) का नंबर आता है। राज्य के स्तर पर महाराष्ट्र को सर्विस सेक्टर से कुल एफडीआई इक्विटी इनफ्लो का 45.22 परसेंट मिला, जबकि इस दौरान कर्नाटक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर और ट्रेडिंग सेक्टर में लीडर रहा।
गौरतलब है कि जनवरी 2000 से मार्च 2006 तक दिल्ली चार्ट में सबसे ऊपर रहा, जिसका कुल एफडीआई इक्विटी इनफ्लो में 24.69 परसेंट हिस्सा था। उसके बाद से महाराष्ट्र आगे रहा है। महामारी के बाद कर्नाटक और गुजरात का शेयर बढ़ा, जबकि दिल्ली का शेयर कम हुआ।
शुरू में तो ऐसा लगता है कि जिन राज्यों में सुधार नहीं हुए और जिनका बिजनेस करने में आसानी की रैंकिंग में खराब प्रदर्शन रहा उन्हें कम एफडीआई मिला। हालांकि, पिछले दशक में अलग-अलग सालों में सरकार द्वारा जारी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) रैंकिंग में महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों का प्रदर्शन खराब रहा।
उदाहरण के लिए, दिल्ली और तमिलनाडु 2015, 2016, 2017 और 2019 में टॉप 10 से बाहर रहे, जबकि कर्नाटक और महाराष्ट्र राज्य का इन चार सालों में सबसे अच्छा प्रदर्शन 8वां रैंक था। आंध्र प्रदेश चार में से तीन सालों में ईओडीबी रैंकिंग में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला राज्य था, जबकि उनमें से एक साल में वह दूसरे नंबर पर रहा।
दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और तेलंगाना जैसे राज्यों की रैंकिंग काफी बेहतर थी, लेकिन एफडीआई इनफ्लो काफी कम था। यह ट्रेंड जारी है। भले ही ईओडीबी रैंकिंग अब 'टॉप अचीवर जैसी कैटेगरी में दी जाती है, जो सबसे ऊपर है।
उसके बाद 'अचीवर', 'फास्ट मूवर्स' और 'एस्पायरर्स' आते हैं। एफडीआई के मामले में टॉप दो राज्य महाराष्ट्र और दिल्ली बिजनेस सेंट्रिक सुधारों के आधार पर राज्यों की बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (बीआरएपी) रैंकिंग के तहत 'एस्पिरर' कैटेगरी में बने हुए हैं।
महाराष्ट्रः पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (सऊदी अरबः 1.29 बिलियन डॉलर), एसएलपी रेनबो होल्डिंग्स (सिंगापुरः 1.2 बिलियन डॉलर), जूसमिरल होल्डिंग्स लिमिटेड (साइप्रसः 1 बिलियन डॉलर)
दिल्लीः माइक्रोसॉफ्ट (यूएसः 1.4 बिलियन डॉलर), मैकरिट्ची इन्वेस्टमेंट्स (सिंगापुरः 0.64 बिलियन डॉलर), ए100 आरओडब्ल्यू (यएसः 0.53 बिलियन डॉलर)
कर्नाटक: रॉबर्ट बॉश इंटरनेशनेल बेतेलिगुंगेन (स्विट्जरलैंडः 4.03 बिलियन डॉलर), मीशो (यूएस: 2.16 बिलियन डॉलर), मीशो (यूएसः 1.07 बिलियन डॉलर)
तमिलनाडुः ब्रिलिएंस टेक्नोलॉजीज (यूएसः 0.5 बिलियन डॉलर), टेनेको मॉरिशस होल्डिंग्स लिमिटेड (मॉरिशसः 0.49 बिलियन डॉलर), मैंगो क्रेस्ट इन्वेस्टमेंट लिमिटेड (मॉरिशसः 0.46 बिलियन डॉलर)
गुजरातः गूगल इंटरनेशनल एलएलसी (यूएसः 4.58 बिलियन डॉलर), जाधू होल्डिंग्स (यूएसः 3.63 बिलियन डॉलर), जाधू होल्डिंग्स (यूएसः 2.21 बिलियन डॉलर)
(समय अवधि अक्टूबर 2019 से दिसंबर 2025 तक है। )