Shivraj Motegaonkar News Update: शिवराज मोटेगांवकर ने महाराष्ट्र के कोचिंग हब लातूर से अपने सफर की शुरुआत की थी और देखते ही देखते 'आरसीसी' (RCC) ब्रांड के तहत राज्य के 8 बड़े शहरों, लातूर, पुणे (हडपसर), नासिक, अकोला, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़, सोलापुर और कोल्हापुर में अपना कोचिंग साम्राज्य फैला लिया। अपनी क्लास में वे अक्सर छात्रों से कहते थे, "मैं देश के हजारों बच्चों को डॉक्टर बनाता हूं, लेकिन अफसोस कि मेरा खुद का कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है।" इस अधूरे सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की, लेकिन नियम के मुताबिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने के लिए परिवार में किसी का इस क्षेत्र में उच्च शिक्षित या अनुभवी होना जरूरी था।
इसी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए मोटेगांवकर ने इस साल एक बड़ी साजिश रची। उनके बेटे ने 2026 में ही 12वीं की परीक्षा पास की थी और वह नीट-यूजी परीक्षा में बैठा था। सीबीआई का मानना है कि अपने बेटे को देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने और भविष्य में अपने नाम से अस्पताल शुरू करने के शॉर्टकट के चक्कर में मोटेगांवकर ने परीक्षा से पहले ही 23 अप्रैल को प्रश्न पत्र लीक करवा लिया।
मोटेगांवकर के इस सफर में कई राजनीतिक मोड़ भी आए। साल 2016 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से छात्रों के सामने मलाल जताया था कि लातूर का प्रभावशाली राजनीतिक 'देशमुख परिवार' (विलासराव देशमुख के वंशज) उनके मेडिकल कॉलेज के सपने का समर्थन नहीं करेगा। हालांकि, अपने आर्थिक और व्यावसायिक हितों को साधने के लिए मोटेगांवकर ने अपनी रणनीति बदली। हालिया विधानसभा चुनावों में वे सीधे कांग्रेस नेता अमित देशमुख के चुनावी मंच पर नजर आए और सार्वजनिक रूप से उनका हाथ थामकर यह संदेश दिया कि वे अपने मेडिकल कॉलेज के प्रोजेक्ट को क्लियर कराने के लिए सत्ता और राजनीति के शीर्ष चेहरों के करीब आ चुके हैं।
एक साधारण शिक्षक से व्यवसायी बने शिवराज मोटेगांवकर के पास कोचिंग सेंटरों के जरिए अकूत संपत्ति आई। उन्होंने प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में डोनेशन और दाखिलों के सिंडिकेट के जरिए भी आय के नए स्रोत बना लिए थे। यही वजह है कि वे लंबे समय से प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (Income Tax) की रडार पर थे। टैक्स चोरी के शक में उनके ठिकानों पर पहले भी सर्वे हो चुके थे। लेकिन पैसे की हवस और मेडिकल माफिया बनने की जिद ने उन्हें नीट परीक्षा की शुचिता को ही तार-तार करने के दलदल में धकेल दिया।
अब जब अदालत ने मोटेगांवकर को 9 दिनों की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया है, तो जांच एजेंसी उनके मोबाइल से मिले डेटा और डिलीट की गई चैट के जरिए यह पता लगाने में जुट गई है कि लातूर और पुणे के किन-किन बड़े डॉक्टरों और रसूखदार राजनेताओं ने अपने बच्चों के लिए मोटेगांवकर से यह लीक पेपर खरीदा था। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में लातूर के कई बड़े नाम इस घोटाले की जद में आने वाले हैं।