Jalna Ethanol Policy Concern Rajesh Tope: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और NCP (शरद गुट) के नेता राजेश टोपे ने केंद्र की इथेनॉल नीति को लेकर राज्य की चीनी-आधारित डिस्टिलरियों की आर्थिक व्यवहार्यता पर चिंता जताई है।
यदि सरकार गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से इथेनॉल उत्पादन पर रोक लगाती है, तो राज्य की चीनी मिलों और इथेनॉल संयंत्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। टोपे ने कहा कि केंद्र की ई-20 सम्मिश्रण नीति को ध्यान में रखते हुए चीनी मिलों ने इथेनॉल परियोजनाओं में हजारों करोड़ रुपये का निवेश किया है।
ऐसे में मुख्य कच्चे माल पर किसी भी तरह की रोक से इन संयंत्रों को कच्चा माल जुटाने और बैंक ऋण की किस्तें चुकाने में परेशानी हो सकती है। टोपे के अनुसार, महाराष्ट्र में करीब 179 डिस्टिलरी चालू हैं।
इनमें 143 चीनी या शीरा आधारित, जबकि 36 अनाज आधारित इकाइयां हैं। चीनी उद्योग से जुड़ी डिस्टिलरियों में करीब 16,000 से 20,000 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि चीनी उद्योग आधारित डिस्टिलरियों की कुल वार्षिक इथेनॉल उत्पादन क्षमता करीब 3.8 अरब लीटर है।
वहीं, अनाज आधारित डिस्टिलरियां सालाना करीब 1.04 अरब लीटर इथेनॉल का उत्पादन कर सकती हैं। टोपे ने कहा कि यदि उद्योग को मुख्य रूप से सी-हेवी शीरे पर निर्भर रहने के लिए मजबूर किया गया तो उत्पादन घट सकता है।
दूसरी ओर कर्मचारियों का वेतन, रखरखाव, बीमा, पर्यावरण अनुपालन और बैंक ऋण की किस्त जैसे निश्चित खर्च जारी रहेंगे। इससे इथेनॉल की प्रति लीटर उत्पादन लागत बढ़ेगी और पहले से कर्ज में डूबी सहकारी चीनी मिलों के नकदी प्रवाह पर दबाव बढ़ सकता है।
टोपे ने डिस्टिलरियों में डीडीजीएस, मक्के के तेल और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे उप-उत्पादों से अधिक मूल्यवर्धन करने की जरूरत बताई। उन्होंने अपशिष्ट जल से बायोगैस या संपीडित बायोगैस तैयार करने का भी सुझाव दिया, केंद्र सरकार के अनुसार, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम देश की प्रमुख ऊर्जा पहलों में शामिल है।
इसका उद्देश्य घरेलू स्तर पर उत्पादित नवीकरणीय ईंधन का उपयोग बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और पर्यावरण पर पड़ने कि घरेलू इयेनॉल को तय कीमतों पर खरीदकर वाले प्रभाव को कम करना है। सरकार का कहना है पेट्रोल में मिलाने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भी कम होता है।
टोपे ने मौजूदा चीनी आधारित डिस्टिलरियों को दोहरी फीड प्रणाली में बदलने का सुझाव दिया। इससे संयंत्र चीनी आधारित कच्चे माल के साथ-साथ अनाज का भी इस्तेमाल कर सकेंगे, कच्चे माल की स्थायी उपलब्धता सुनिश्चित कर अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन को भी बढ़ावा देना चाहिए।
2026-27 के सत्र में 3 प्रमुख लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाना होगा चीनी की पर्याप्त आपूर्ति, उचित कीमत, ई-20 सम्मिश्रण के लिए उपलब्धता और डिस्टिलरियों में पहले से किए गए निवेश की आर्थिक व्यवहार्यता बनाए रखना।