तीन वर्षों में 926 नाबालिग विभिन्न आपराधिक मामलों से जुड़े।
हत्या, हत्या के प्रयास और डकैती जैसे अति गंभीर अपराधों में 128 किशोरों की संलिप्तता।
339 किशोर गंभीर और 459 सामान्य श्रेणी के मामलों में शामिल।
16 से 18 वर्ष आयु वर्ग की भागीदारी को लेकर चिंता।
जिला सरकारी वकील बाबासाहेब इंगले ने अभिभावकों से बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देने की अपील की।
Jalna Juvenile Crime News Child Protection: जालना जिले में पिछले तीन वर्षों के दौरान 926 नाबालिगों की विभिन्न आपराधिक मामलों में संलिप्तता सामने आई है। इनमें 128 किशोर हत्या, हत्या के प्रयास और डकैती जैसे अति गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में शामिल पाए गए। आंकड़े किशोर अपराध की रोकथाम और समय रहते हस्तक्षेप की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
जालना जिले में किशोरों की आपराधिक मामलों में बढ़ती संलिप्तता चिंता का विषय बन गई है। बाल न्याय मंडल की ओर से संकलित आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 926 नाबालिग विभिन्न अपराधों से जुड़े मामलों में सामने आए। इनमें 128 किशोर हत्या, हत्या के प्रयास और डकैती जैसे अति गंभीर अपराधों से संबंधित मामलों में शामिल पाए गए। खासकर 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग की भागीदारी ने रोकथाम और समय रहते मार्गदर्शन की जरूरत को सामने रखा है।
जालना, बाल न्याय मंडल की ओर से संकलित आंकड़ों के मुताबिक, जिले में पिछले तीन वर्षों के दौरान विधि से संघर्षरत 926 बालकों से जुड़े मामले सामने आए। इनमें 128 किशोर अति गंभीर अपराधों की श्रेणी में शामिल थे। वहीं, 339 किशोर गंभीर और 459 सामान्य श्रेणी के मामलों से जुड़े पाए गए।
हत्या, हत्या के प्रयास और डकैती जैसे अपराधों में किशोरों की संलिप्तता ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ परिवार, शिक्षा और बाल संरक्षण व्यवस्था की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
रिपोर्ट में गलत संगत, पारिवारिक उपेक्षा, नशे के संपर्क, शिक्षा में आने वाली बाधाओं, मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर हिंसक सामग्री जैसे संभावित जोखिम कारकों पर ध्यान दिलाया गया है। हालांकि, इन कारणों और अपराधों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए विस्तृत अध्ययन जरूरी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरों को समय पर परामर्श, शिक्षा और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है। उनके व्यवहार में बदलाव, पढ़ाई से दूरी या संगत में बदलाव जैसे संकेतों को समझकर शुरुआती स्तर पर सहायता दी जा सकती है।
जिला सरकारी वकील बाबासाहेब इंगले ने अभिभावकों से बच्चों के मित्रों, दिनचर्या और मोबाइल गतिविधियों के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों से नियमित संवाद और उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देकर संभावित समस्याओं को समय रहते पहचाना जा सकता है।
किशोर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस, शिक्षण संस्थाओं, अभिभावकों और बाल संरक्षण एजेंसियों के बीच समन्वय भी जरूरी है। मामलों में निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों का संकलन और किशोर न्याय कानून के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण है।
जालना जिले में सामने आई कुछ घटनाएं भी इस चुनौती की गंभीरता दर्शाती हैं। 25 सितंबर 2026 को एक प्रशिक्षक की चाकू मारकर हत्या के मामले में नाबालिग की संलिप्तता सामने आई थी। इससे पहले 22 जुलाई 2025 को भोकरदन में एक छात्र की गला घोंटकर हत्या के मामले में भी किशोरों के शामिल होने की बात सामने आई थी।
वहीं, 8 मई 2026 को चंदनझिरा क्षेत्र में पिता की हत्या का बदला लेने के लिए की गई हत्या के मामले में दो नाबालिगों की भागीदारी सामने आने का उल्लेख है।
तीन वर्षों के आंकड़े संकेत देते हैं कि किशोर अपराध की रोकथाम के लिए केवल कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। परिवार, स्कूल और संबंधित एजेंसियों को मिलकर बच्चों की समस्याओं को समय रहते समझने और उन्हें उचित मार्गदर्शन देने की जरूरत है।