Jalgaon MLC Election: महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनावों की पृष्ठभूमि में महायुति गठबंधन के भीतर बगावत का संकट खत्म होने का दावा किया जा रहा था। नाशिक में बगावत पर नियंत्रण के बाद जलगांव का विवाद भी सुलझ जाने की बात राज्य के मंत्री गिरीश महाजन ने कही थी। लेकिन इसके बाद सामने आई एक अप्रत्याशित घटना ने महायुति नेताओं की चिंता फिर बढ़ा दी है।
शिवसेना की बागी उम्मीदवार रेश्मा काले अचानक नॉट रिचेबल हो गई हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में सस्पेंस पैदा हो गया है। विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद रेश्मा काले ने शुरुआत से ही अपना रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि यदि नासिक की बागी उम्मीदवार अपना नाम वापस लेती हैं, तो वह भी जलगांव से पीछे हट जाएंगी। नासिक में राजनीतिक हालात सामान्य होने के बाद माना जा रहा था कि जलगांव का मुद्दा भी सुलझ जाएगा। महायुति के वरिष्ठ नेताओं ने दावा किया था कि विवाद खत्म हो चुका है और काले की वापसी की केवल औपचारिक घोषणा बाकी है।
हालांकि, इसके बाद रेश्मा काले ने मीडिया से बातचीत में अलग संकेत दिए। उन्होंने कहा था कि उन्हें क्षेत्र से अच्छा समर्थन मिल रहा है और कार्यकर्ता चाहते हैं कि वे चुनाव लड़ें। उन्होंने यह भी कहा था कि अंतिम निर्णय वरिष्ठ नेतृत्व करेगा। इस बयान के बाद उनके चुनाव से हटने या मैदान में बने रहने को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गईं।
रेश्मा काले से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वह किसी के संपर्क में नहीं आ सकीं। उनके अचानक नॉट रिचेबल होने से राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या वह महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार नंदकिशोर महाजन को समर्थन देंगी या अंत तक चुनावी मैदान में रहकर गठबंधन की मुश्किलें बढ़ाएंगी।