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जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने नदी और पर्वत संरक्षण के लिए प्रभावी कानून बनाने पर जोर दिया।
जैन हिल्स में ‘ब्रह्मगिरि की हरियाली, गोदावरी की पवित्रता’ का नारा दिया गया।
कार्यशाला में जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के विभिन्न प्रकल्पों की जानकारी साझा की गई।
मिशन 500 करोड़ लीटर जल संचय’ पर प्रस्तुति दी गई।
नदी संरक्षण अभियान से 5 हजार शिक्षकों और 60 हजार विद्यार्थियों को जोड़ने के प्रयासों की जानकारी दी गई।
Jain Hills Water Conservation: नदियां केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि संस्कृति की सांस और जीवन का आधार हैं। इन्हें बचाने के लिए सरकार, समान, संतों और उद्योग जगत को एक साथ आना होगा। जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने जैन हिल्स में यह आह्वान करते हुए 'ब्रह्मगिरि की हरियाली, गोदावरी की पवित्रता' का नया नारा दिया।
महाराष्ट्र नदी संवर्धन अभियान की तीन दिवसीय कार्यशाला के समापन पर नदियों और पर्वतों के संरक्षण के लिए प्रभावी कानून बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया। डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि नदियों को बचाने के लिए केवल जल संरक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रकृति के साथ मनुष्य के रिश्ते को भी सुरक्षित रखना होगा।
नदियों का पुनर्जीवन केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीड़ियों के प्रति जिम्मेदारी है। उन्होंने नदी और पर्वत संरक्षण को एक-दूसरे से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए इनके संरक्षण के लिए व्यापक जनभागीदारी की आवश्यकता रेखांकित की।
कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों में जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के लिए किए गए प्रवासी की जानकारी दी गई। शिवाजी भोईटे ने बताया कि जैन इरिगेशन के संस्थापक भंवरलाल जैन की पहल से खानदेश में कोताई बंधारे के रूप में सार्वजनिक-निजी भागीदारी का जल संरक्षण प्रकल्प पूरा हुआ। इससे सिवाई क्षेत्र बढ़ा और वर्षा पर निर्भर खेती को सिंचाई का लाभ मिला।
डॉ.अनिता पाटील ने आसनखेड़ा में नदी पर किए गए कार्यों की जानकारी दी, जबकि प्रशांत गायकवाड ने तितूर नदी की विशेषताओं और उसके संरक्षण के प्रयासों पर प्रस्तुति दी। पाच पाटील ने मिशन 500 करोड़ लीटर जलसंवय' की जानकारी साझा की।
सागर मित्र विशाल सीमकुल ने समुद्र और समुद्र के नीचे मौजूद वनस्पतियों के महत्व पर प्रकाश डाला। तानाजी भोसले ने बताया कि नदी संरक्षण के कार्य से 5 हजार शिक्षकों और 60 हजार विद्यार्थियों को जोड़ने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने हिंगोली जिले के वसमत की असना नदी से जुड़े मुद्दों पर भी विचार रखें। मेजर जनरल संजय विश्वासराव सहित अन्य वक्ताओं ने नदी संरक्षण, जल प्रबंधन और जनभागीदारी के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। कार्यशाला में नदियों की स्वच्छता। बनाए रखने में संतों की भूमिका पर भी चर्चा हुई।