जलगांव नगर निगम विवाद सोर्स: सोशल मीडिया
जलगांव

जलगांव में IAS के दफ्तर में निजी दरबार, अमृत-2, एन-कैप और स्वच्छ भारत मिशन की फाइलों तक पहुंच का दावा

Jalgaon Municipal Corporation Controversy: आयुक्त कार्यालय के पास निजी व्यक्तियों की कथित मौजूदगी, सरकारी फाइलों तक पहुंच और कमीशन वसूली के आरोपों की जांच की मांग

मनीषा बोंदरे

Highlights

  • जलगांव महानगरपालिका में आयुक्त कार्यालय के पास बाहरी निजी व्यक्तियों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठे।

  • अमृत-2, एन-कैप और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं से जुड़ी फाइलों तक पहुंच होने का दावा।

  • ठेकेदारों के बिलों के भुगतान के बदले 40 से 50 लाख रुपये तक कथित कमीशन वसूली के आरोप।

  • मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठकों में अनधिकृत लोगों की मौजूदगी का भी दावा।

  • निजी व्यक्तियों की नियुक्ति, सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच और वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच की मांग।

Jalgaon Municipal Corporation Government Transparency: जलगांव महानगरपालिका में प्रशासनिक कामकाज और सरकारी परियोजनाओं की निगरानी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि आयुक्त आदित्य जीवने के कार्यालय के पास स्थित मुख्य कॉन्फ्रेंस रूम में पांच से सात निजी व्यक्ति सक्रिय रहते हैं और अमृत-2, एन-कैप, पर्यावरण तथा स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं से जुड़े कामकाज में उनकी मौजूदगी रहती है। यह भी दावा किया गया है कि इन व्यक्तियों की सरकारी फाइलों और वित्तीय गतिविधियों तक पहुंच है।

जलगांव मनपा में निजी व्यक्तियों की मौजूदगी पर सवाल

इसके अलावा, ठेकेदारों के बिलों के भुगतान के बदले कथित तौर पर 40 से 50 लाख रुपये तक कमीशन वसूली के आरोप लगाए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठकों में बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी और कुछ निजी सहायकों के वेतन भुगतान को लेकर भी सवाल उठे हैं। फिलहाल, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। मनपा प्रशासन से नियुक्तियों, अनुमति, भुगतान प्रक्रिया और सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच के संबंध में स्पष्टीकरण देने की मांग की गई है।

सरकारी फाइलों और भुगतान प्रक्रिया में दखल के आरोप

जलगांव शहर महानगरपालिका में प्रशासनिक कामकाज और सरकारी परियोजनाओं की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि मनपा आयुक्त आदित्य जीवने के कार्यालय के पास स्थित मुख्य कॉन्फ्रेंस रूम में बाहरी निजी व्यक्तियों का एक समूह सक्रिय है, जिसकी मौजूदगी सरकारी योजनाओं, वित्तीय कामकाज और फाइलों से संबंधित गतिविधियों के दौरान रहती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सरकारी योजनाओं की फाइलों तक पहुंच का दावा

मिली जानकारी के अनुसार, अमृत-2, एन-कैप, पर्यावरण और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं से जुड़े कामकाज के दौरान पांच से सात निजी व्यक्तियों की मौजूदगी का दावा किया गया है। आरोप है कि ये लोग लैपटॉप के माध्यम से अधिकारियों के वित्तीय कामकाज, महत्वपूर्ण निर्णयों और सरकारी फाइलों से जुड़ी गतिविधियों में शामिल रहते हैं। इस मामले में सवाल उठाए जा रहे हैं कि इन व्यक्तियों की नियुक्ति किस आदेश के तहत हुई है और क्या उन्हें सरकारी दस्तावेजों तक पहुंचने की औपचारिक अनुमति प्राप्त है। यदि ऐसी अनुमति नहीं है, तो संवेदनशील कार्यालयीन क्षेत्रों में उनकी मौजूदगी कैसे बनी हुई है, यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

ठेकेदारों के भुगतान में कथित कमीशन का आरोप

आरोपों में यह भी दावा किया गया है कि ठेकेदारों के करोड़ों रुपये के बिलों के भुगतान के बदले 40 से 50 लाख रुपये तक कथित कमीशन वसूली का नेटवर्क सक्रिय है। दावा है कि इससे जुड़े लोग नाशिक, नागपुर और मुंबई में ठेकेदारों से संपर्क कर रकम वसूलते हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र रूप से सत्यापित दस्तावेज या जांच निष्कर्ष उपलब्ध नहीं हैं। मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित बिलों, भुगतान प्रक्रिया, फाइलों की आवाजाही और वित्तीय लेन-देन की जांच आवश्यक मानी जा रही है।

निजी सहायकों के वेतन भुगतान पर भी सवाल

मनपा में उपमहापौर, सभापतियों, नेता प्रतिपक्ष और विभिन्न गुटनेताओं के कार्यालयों में निजी सहायकों के रूप में कुछ लोगों के कार्यरत होने की जानकारी भी सामने आई है। दावा किया गया है कि इनका वेतन मनपा के आधिकारिक खाते से देने के बजाय 12वें माले पर पदस्थ एक अधिकारी द्वारा दिया जाता है। इस दावे की पुष्टि के लिए नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों, वेतन भुगतान के स्रोत और संबंधित अधिकारी की भूमिका की जांच जरूरी है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बाहरी लोगों की मौजूदगी का दावा

मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठकों में भी निजी व्यक्तियों की मौजूदगी के आरोप लगाए गए हैं। यदि संवेदनशील सरकारी बैठकों में बिना अनुमति बाहरी लोग शामिल हुए हैं, तो यह सरकारी गोपनीयता और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय हो सकता है। इसलिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि ऐसी बैठकों में कौन-कौन उपस्थित रहता है और बाहरी व्यक्तियों को शामिल करने के लिए क्या आवश्यक अनुमति ली गई थी।

स्वतंत्र जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग

इन आरोपों के बीच मनपा प्रशासन से निजी व्यक्तियों की नियुक्ति, सरकारी फाइलों तक उनकी पहुंच, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उनकी मौजूदगी और ठेकेदारों के भुगतान की प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।

आवश्यक होने पर स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग भी उठाई गई है। फिलहाल, आरोपों की पुष्टि जांच और दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकती है। मनपा प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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