जलगांव पत्थरबाजी केस सोर्स: प्रतीकात्मक तस्वीर
जलगांव

6 दिन कस्टडी में रखा आरोपी निकला नाबालिग, जलगांव पथराव मामले में 16 आरोपी न्यायिक हिरासत में; पुलिस पर सवाल?

Stone Pelting Case: जलगांव के किनगांव पथराव मामले में 16 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। एक आरोपी के नाबालिग होने का दावा सामने आया, अदालत ने बाल न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए।

मनीषा बोंदरे

Highlights

  • किनगांव पथराव मामले में करीब 60 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज।

  • गिरफ्तार 16 आरोपियों को अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेजा।

  • एक आरोपी के परिजनों ने जन्म प्रमाणपत्र पेश कर नाबालिग होने का दावा किया।

  • अदालत ने संबंधित किशोर को बाल न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए।

  • APCR और एकता संगठन ने कानून और बाल न्याय प्रणाली के प्रावधानों के पालन की मांग की।

Jalgaon Kingaon Yaval Stone Pelting Case 16 Accused: जलगांव के किनगांव पथराव मामले में गिरफ्तार 16 आरोपियों को यावल अदालत ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सुनवाई के दौरान एक आरोपी के परिजनों ने जन्म प्रमाणपत्र पेश कर उसके नाबालिग होने का दावा किया। अदालत ने उसे बाल न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए। APCR और एकता संगठन ने कानूनी प्रक्रिया के पालन की मांग की है।

16 आरोपियों को न्यायिक हिरासत

जलगांव. किनगांव (यावल) में प्रार्थना स्थल के सामने आंदोलन के दौरान हुए पथराव के मामले में यावल पुलिस स्टेशन में FIR क्रमांक 390/2026 दर्ज की गई है। पुलिस ने विभिन्न धाराओं और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत करीब 60 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस मामले में गिरफ्तार 16 आरोपियों की पुलिस हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें यावल अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी 16 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

एक आरोपी के नाबालिग होने का दावा

अदालती सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू सामने आया। 16 आरोपियों में शामिल एक व्यक्ति के परिजनों ने जन्म प्रमाणपत्र पेश करते हुए उसके नाबालिग होने का दावा किया। अदालत ने प्रस्तुत दस्तावेजों और अभियोजन पक्ष के तर्कों पर विचार किया। इसके बाद संबंधित किशोर को वयस्क आरोपियों की तरह न्यायिक प्रक्रिया में रखने के बजाय बाल न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए।

इस घटनाक्रम के बाद नाबालिग होने का दावा किए गए व्यक्ति की गिरफ्तारी और उसे छह दिनों तक पुलिस हिरासत में रखे जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। संबंधित संगठनों ने इस पहलू की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

APCR और एकता संगठन ने मांगी कानूनी सुरक्षा

APCR और एकता संगठन, जलगांव शहर ने मामले के आरोपियों को शुरुआत से कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। संगठनों के प्रतिनिधि पुलिस स्टेशन और अदालत की कार्यवाही के दौरान उपस्थित रहे। उनका कहना है कि आरोपों की जांच और अदालती कार्रवाई कानून एवं संविधान के दायरे में होनी चाहिए।

आरोपियों की ओर से फैजपुर के एड. शेख खालिद, यावल के एड. मोहित शेख और एड. यदूद शेख तथा भुसावल के एड. असरार पिंजारी ने अदालत में पक्ष रखा। APCR के आरिफ देशमुख और एकता संगठन के फारुक शेख, अनिश शाह, दानियल शेख, हाफिज रहीम पटेल तथा नजमुद्दीन शेख ने कानूनी सहायता और समन्वय का कार्य किया।

दोष तय करना अदालत का काम

संगठनों ने कहा कि पथराव और कानून-व्यवस्था भंग करने के आरोपों पर न्यायिक प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से जारी रहनी चाहिए। केवल आरोप लगने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता और प्रत्येक आरोपी को कानून के अनुसार अपना बचाव करने का अवसर मिलना जरूरी है।

विशेष रूप से नाबालिग के मामले में बाल न्याय प्रणाली के सुरक्षात्मक प्रावधानों का पालन आवश्यक है। APCR और एकता संगठन ने मांग की है कि पूरे मामले की कार्रवाई कानून, संविधान और किशोर न्याय व्यवस्था के नियमों के अनुसार की जाए।

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