गोंदिया. रास्तों पर यातायात की गति नियंत्रित रहें और कोई भी हादसा न हों, इसलिए रास्तों पर गतिरोधक बनाए जाते है. लेकिन लोगों की सुविधाओं के लिए बनाए गए यह गतिरोधक कभी-कभी तकलीफदेह भी बन जाते है. शहर में जगह-जगह गली मुहल्लों में नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए गतिरोधक वाहन चालकों के लिए मुसिबत बन गए है. इन गतिरोधकों के कारण कई बीमारियों को निमंत्रण मिल रहा है.
उल्लेखनीय है की जहां स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, मंदिर या सार्वजनिक ठिकानों, चौराहों पर गतिरोधक बनाना जरुरी है. लेकिन शहर के हर गल्ली-मुहल्लों में गतिरोधक बने हुए है और वह भी नियमों की अनदेखी करते हुए. गतिरोधक की उंचाई, चौड़ाई के संदर्भ में मापदंड निश्चित है. लेकिन शहर में बनाए गए कई गतिरोधकों के संदर्भ में इन मापदंडों की अनदेखी की गई है. साथ ही दो गतिरोधकों में नियमों के तहत जितना अंतर होना चाहिए, उस नियम को भी तोड़ा गया है.
कुछ जगहों पर केवल 10-20 फीट की दूरी पर गतिरोधक बनाएं गए है. साथ ही ज्यादा उंचे और चौड़े गतिरोधकों के कारण यहां वाहन ले जाते समय काफी दिक्कते आती है. कई बार तो वाहन चालकों का वाहनों से नियंत्रण छूट जाता है. इससे गंभीर हादसा होने की संभावना है. साथ ही इन गतिरोधकों के कारण कमर, पीठ तथा गर्दन की बीमारियां होने लगी है. कई बार तो यह गतिरोधक दिखाई ही नहीं देते.
रात के समय अचानक इन गतिरोधकों से जब वाहन गुजरते है, तो वाहन चालकों को जोर का झटका भी लगता है. इससे भी बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है. इन गतिरोधकों पर रेडियम की पट्टीयां लगाना जरुरी है. इस सब स्थिति की ओर नगर परिषद और लोक निर्माण विभाग को ध्यान देने की जरुरत है. साथ ही गतिरोधक बनाते समय नियमों का भी ध्यान रखना जरुरी है. इस पर जल्द कार्रवाई की मांग शहरवासियों ने की है.
हादसे न हो इसलिए गतिरोधक होते है. लेकिन शहर में नियमों की अनदेखी कर बनाए गए गतिरोधक हादसों को निमंत्रण दे रहे है. इन गतिरोधकों से गुजरते वक्त वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे है. साथ ही पीठ की समस्याएं भी उत्पन्न हो रही है. इस ओर ध्यान देने की जरुरत है.