Maharashtra Government Decision Gondia News: महाराष्ट्र सरकार द्वारा 5 अगस्त को जारी शासन निर्णय के विरोध में आदिवासी विद्यार्थियों का आंदोलन लगातार 13वें दिन भी जारी रहा। गोंदिया जिले के देवरी स्थित एकात्मिक आदिवासी विकास प्रकल्प कार्यालय के सामने सैकड़ों विद्यार्थी ठिय्या आंदोलन कर शासन के निर्णय का विरोध कर रहे हैं।
शासन की ओर से निर्णय को फिलहाल स्थगित किए जाने के बावजूद विद्यार्थियों का कहना है कि केवल स्थगन पर्याप्त नहीं है। शासन निर्णय को पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए। आदिवासी छात्रावासों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर विद्यार्थियों ने आंदोलन शुरू किया है।
विद्यार्थियों का आरोप है कि उनकी समस्याओं की ओर शासन का पर्याप्त ध्यान नहीं है। अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने और आंदोलन को व्यापक समर्थन दिलाने के लिए विद्यार्थियों ने आदिवासी समाज के लोगों से 'एक मुट्ठी चावल और 20 रुपये की मदद करने की अपील की थी।
विद्यार्थियों की अपील का ग्रामीणों पर असर देखने को मिला। गोंदिया जिले के विभिन्न गांवों में ग्रामीणों ने घर-घर जाकर एक मुट्ठी चावल और 20-20 रुपये एकत्र किए और आंदोलनकारी विद्यार्थियों को सौंपे। ग्रामीणों ने केवल आर्थिक व खाद्यान्न सहायता ही नहीं की, बल्कि आंदोलन स्थल पर पहुंचकर विद्यार्थियों के साथ खड़े होकर उनके आंदोलन को समर्थन भी दिया।
आंदोलनकारी विद्यार्थियों ने शासन से उनकी सभी मांगों को ताकाल मंजूर करने तथा 5 अगस्त के शासन निर्णय को पूरी तरह रद्द करने की मांग की है। विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
आंदोलनकारियों ने आदिवासी मंत्री अशोक उईक के इस्तीफे की मांग भी की है। 13 दिनों से जारी इस आंदोलन के चलते आदिवासी विद्यार्थियों की मांगों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब सरकार विद्यार्थियों की मांगों पर क्या निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
आदिवासी विद्यार्थियों का संयम अब समाप्त होता जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने आगामी दो दिनों में विद्यार्थियों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा, यह आंदोलन केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महाराष्ट्र के आदिवासी समाजबंधुओं को साथ लेकर इसे व्यापक जनआंदोलन में तब्दील किया जाएगा।
आदिवासी विद्यार्थी संघ व AIISF की ओर से चेतावनी दी गई है कि मांगों की अनदेखी जारी रही ती गांव-गांव से आदिवासी समाज के लोग सड़कों पर उत्तरेंगे और शासन को विद्यार्थियों के न्यायसंगत अधिकारों की दखल लेने के लिए मजबूर किया जाएगा।
सगठनों ने शासन से अपील की है कि स्थिति गंभीर होने से पहले विद्यार्थियों की नागों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लिया जाए अन्यथा आंदोलन का विस्तार करने की जिम्मेदारी पूरी तरह शासन की होगी।