Gondia Prashant Padole:गोंदिया के गोरेगांव MIDC में प्रस्तावित 5 KLPD महुआ फूल/फल आधारित स्पिरिट डिस्टिलरी और ब्लेंडिंग-बॉटलिंग यूनिट को लेकर विरोध बढ़ गया है।
सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने 18 सितंबर की जनसुनवाई स्थगित कर परियोजना की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने और नागरिकों को आपत्ति दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की है।
गोंदिया जिले में प्रस्तावित शराब डिस्टिलरी परियोजना को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। गोरेगांव MIDC के ए-12 क्षेत्र में प्रस्तावित 5 KLPD महुआ फूल/फल आधारित स्पिरिट डिस्टिलरी तथा ब्लेंडिंग एंड बॉटलिंग यूनिट के लिए 18 सितंबर को सार्वजनिक जनसुनवाई प्रस्तावित है। सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने इस जनसुनवाई को तत्काल स्थगित करने की मांग की है।
सांसद प्रशांत पडोले ने कहा कि गोंदिया में उद्योग और रोजगार का स्वागत है, लेकिन विकास के नाम पर ऐसी परियोजना स्वीकार नहीं की जा सकती, जिससे आम नागरिकों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो। उन्होंने शराब के अत्यधिक सेवन से परिवारों के सामने पैदा होने वाले आर्थिक और सामाजिक संकट का भी उल्लेख किया।
पडोले ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से 23 अगस्त 2026 को जारी आदेश का हवाला देते हुए परियोजना की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
गोंदिया जिले में सांसद ने मांग की है कि 18 सितंबर की प्रस्तावित जनसुनवाई को स्थगित किया जाए और परियोजना से जुड़े सभी दस्तावेज एवं महत्वपूर्ण जानकारी आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही प्रमुख समाचार माध्यमों के जरिए जनसुनवाई की तारीख, समय, स्थान और परियोजना से संबंधित जानकारी का व्यापक प्रचार किया जाए।
उनका कहना है कि नागरिकों को परियोजना के संभावित पर्यावरणीय, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को समझने तथा अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
सांसद प्रशांत पडोले के अनुसार, जब तक स्थानीय नागरिकों को परियोजना की पूरी जानकारी नहीं मिलेगी, तब तक वे इसके संभावित प्रभावों पर प्रभावी तरीके से अपनी राय या आपत्ति कैसे दर्ज करा पाएंगे।
उन्होंने मांग की है कि पहले जनसुनवाई की प्रक्रिया को रोककर जनता को विश्वास में लिया जाए और व्यापक प्रचार किया जाए। इसके बाद पर्याप्त समय देकर नई तारीख पर सार्वजनिक जनसुनवाई आयोजित की जाए।