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इटियाडोह जलाशय से वर्ष 2026-27 के ग्रीष्मकालीन सीजन में धान की फसल के लिए 5,050 हेक्टेयर क्षेत्र को पानी मिलेगा।
इस फैसले से गोंदिया, भंडारा और गड़चिरोली जिले के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
वर्तमान में जलाशय में 90.28 प्रतिशत पानी उपलब्ध है। पेयजल के लिए आरक्षण के बाद 93.74 दलघमी पानी सिंचाई के लिए मिलेगा।
Itiyadoh Irrigation Project: राज्य में सूखे जैसी स्थिति और संभावित जलसंकट को देखते हुए इस वर्ष इटियाडोह जलाशय से ग्रीष्मकालीन धान फसल के लिए पानी मिलेगा या नहीं, इसे लेकर किसानों में असमंजस था। बुधवार को आयोजित इटियाडोह परियोजना स्तरीय जल उपयोगकर्ता संस्था की बैठक में वर्ष 2026-27 के ग्रीष्मकालीन सीजन के लिए 5,050 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। जल उपयोगकर्ता संस्था के अध्यक्ष शिवनारायण पालीवाल ने यह जानकारी दी।
बैठक में शासन के निर्देशानुसार संभावित पेयजल संकट के लिए पानी आरक्षित रखने के बाद शेष जल का उपयोग सिंचाई के लिए करने पर सहमति बनी। इस निर्णय से गोंदिया, भंडारा व गड़चिरोली जिले के किसानों को लाभ मिलेगा। वर्तमान में जलाशय में 90.28 प्रश. जलसंग्रह उपलब्ध है। संभावित जलसंकट के लिए आरक्षण करने के बाद 93.74 दलघमी पानी ग्रीष्मकालीन धान की सिंचाई के लिए उपलब्ध होगा।
इसमें आरमोरी व वडसा तहसील के 2,020 हेक्टेयर तथा लाखांदुर व अर्जुनी मोरगांव तहसील के 3,030 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि पानी का वितरण सुचारु रूप से किया जाए, ताकि पानी की बर्बादी न हो। सिंचाई के अंतिम छोर के क्षेत्रों को योजना से बाहर रखने तथा जिन संस्थाओं का पानीपट्टी बकाया है, उन्हें इस सीजन में पानी नहीं देने का निर्णय लिया गया।
इटियाडोह जलाशय के सिंचाई क्षेत्र में जिले की अर्जुनी मोरगांव, भंडारा जिले की लाखांदुर तथा गडचिरोली जिले की वडसा और आरमोरी तहसीलों के किसान शामिल हैं। जलाशय के पानी का नियोजन और किसानों से जलटैक्स वसूलने की जिम्मेदारी जल उपयोगकर्ता संस्थाओं की है। क्षेत्र में कुल 55 जल उपयोगकर्ता संस्थाएं कार्यरत हैं। इनमें लाखांदुर तहसील में 14, अर्जुनी मोरगांव में 21 तथा वडसा और आरमोरी में 20 संस्थाएं शामिल हैं। ग्रीष्मकालीन धान के लिए पानी उपलब्ध कराने के निर्णय से क्षेत्र के किसानों में खुशी का माहौल है।