Gondia Human Wildlife Conflict ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
गोंदिया

बारिश के बाद अब गोंदिया में हाथियों का कहर, किसानों पर दोहरी मार; 60 हेक्टेयर फसल बर्बाद

Gondia Crop Damage: गोंदिया में जंगली हाथियों ने 60 हेक्टेयर मक्का फसल बर्बाद की। पहले बारिश से नुकसान झेल चुके किसान अब नए संकट से जूझ रहे हैं।

अंकिता पटेल

Gondia Human Wildlife Conflict: गोंदिया कभी कुदरती तो कभी कृत्रिम संकट के कारण किसानों की कमर टूट चुकी है। लेकिन, इसके बाद भी वे बिना थके बड़ी हिम्मत के साथ फिर से खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन, ऐसा लगता है कि उन पर संकट कम नहीं हो रहा है। पहले बेमौसम बारिश ने धान और मक्का किसानों की रोजी-रोटी छीन ली थी।

वे इससे किसी तरह उबरने की कोशिश कर ही रहे थे कि अब जंगली हाथियों ने 60 हेक्टेयर में लगी मक्का की फसल बर्बाद कर दी है। जिले में पिछले चार-पांच दिनों से जंगली हाथियों ने उत्पात मचा रखा है।

गढ़चिरोली जिले से जंगली हाथियों का एक झुंड अर्जुनी मोरगांव तहसील के गोठनगांव, केशोरी परिसर में घुस आया है। फिलहाल जिले में रबी सीजन के लिए धान और मक्का की खेती शुरू है।

लेकिन, ठीक वैसे ही जंगली हाथियों ने खेतों के किनारों पर उत्पात मचा रखा है। वन विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 60 हेक्टेयर में लगी फसलों को नुकसान हुआ है।

क्योंकि इस परिसर में हाथियों का झुंड है, इसलिए नुकसान के आंकड़े में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। वहीं क्षेत्र में हाथियों के मौजूदगी से किसानों के जान का खतरा भी मंडरा रहा है। जिसे लेकर लोगों में खेत व अपने क्षेत्र में जाना भी खतरे से खाली नहीं है।

बजट सत्र में बोनस की घोषणा नहीं

धान की खखेती की लागत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। खेती की लागत 25 से 30 हजार रु. प्रति एकड़ है, जबकि धान की कीमत इसकी तुलना में बहुत कम है, इसलिए धान की खेती घाटे का सौदा बन गई है। इससे उबरने के लिए सरकार धान उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन अनुदान के तौर पर बोनस देने की घोषणा करती है। लेकिन, सरकार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र और बजट सत्र में भी बोनस की घोषणा नहीं की। इससे बोनस के हकदार 1 लाख 32 हजार किसानों की उम्मीदें टूट गई हैं।

जिले में कर्जमाफी के पात्र किसान संकट में

सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में किसानों के दो लाख रु. तक के कर्ज माफ करने की घोषणा की, साथ ही, नियमित कर्ज चुकाने वाले किसानों को 50 हजार रु. की सब्सिही दी जाएगी, अनुमान है कि जिले में 48,600 किसान इसके पात्र होंगे, लेकिन, सरकार ने सिर्फ पात्र शब्द का इस्तेमाल किया है, और इसमें क्या निकष तय किए जा रहें है, इस पर बहुत कुछ निर्भर करता है।

जिले का आर्थिक चक्र खेती पर निर्भर

जिले का आर्थिक चक्र खेती पर निर्भर करता है। इसलिए, खेती किसानों की आय का मुख्य स्रोत है। इसलिए, अगर फसल बर्बाद हो गई, तो पूरे साल परिवार का गुजारा और अन्य खर्च कहां से होगा? यह एक कठिन सवाल है जो किसानों के सामने खड़ा हो गया है।

जिले में धान की खेती करने वाले किसान पारंपरिक धान की खेती को छोड़कर मक्के की खेती की ओर रुख कर रहे हैं। लेकिन, कभी बेमौसम बारिश तो कभी जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

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