Highlights:
सितंबर 2026 के अंत तक गोंदिया जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान कुल 27 मामले सामने आए।
दर्ज प्रकरणों में 18 अनुसूचित जाति और 9 अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं।
दर्ज मामलों में हत्या के 4, दुष्कर्म के 3 और जातिसूचक गालीगलौज के 10 प्रकरण शामिल हैं।
Gondia District Administration: गोंदिया जिले में एट्रॉसिटी (अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम) के मामलों की जांच में आई तेजी सराहनीय है। हालांकि, मामलों में दोषसिद्धि का प्रतिशत बढ़ाने के लिए संबंधित विभागों को आने वाली बाधाओं को प्राथमिकता से दूर करना होगा।
यह निर्देश अपर जिलाधिकारी अभिजीत घोरपड़े ने जिलाधिकारी कार्यालय के सभागृह में जिला सतर्कता व नियंत्रण समिति की आयोजित बैठक दिए। घोरपड़े ने कहा कि जिले में एट्रॉसिटी के मामलों की पुलिस जांच प्रक्रिया में स्थानीय अपराध शाखा के स्तर पर तेजी आई है, जो सराहनीय है।
लेकिन मामलों में दोषसिद्धि का प्रमाण कम दिखाई दे रहा है। इसे बढ़ाने के लिए पुलिस विभाग को अधिक संवेदनशीलता के साथ जांच करना होगा। बैठक में समाज कल्याण सहायक आयुक्त किशोर भोयर, पुलिस अधीक्षक के प्रतिनिधि, जिला सूचना अधिकारी अंजु कांबले-निमसरकर, विधि अधिकारी मिलिंद चवरे तथा नागरिक अधिकार संरक्षण प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि उपस्थित थे। समिति के सदस्य सचिव व समाज कल्याण सहायक आयुक्त किशोर भोयर ने सितंबर 2026 के अंत तक प्राप्त मामलों की स्थिति प्रस्तुत की।
इसमें पुलिस जांच के अधीन मामले, पुलिस की अंतिम रिपोर्ट वाले प्रकरण, न्यायालय में लंबित मामले तथा आर्थिक सहायता के लिए लंबित प्रकरणों की जानकारी दी गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सितंबर 2026 के अंत तक जिले में एट्रॉसिटी के कुल 27 मामले दर्ज हुए। इनमें हत्या के 4, दुष्कर्म के 3, छेड़छाड़ के 2, मारपीट अथवा गंभीर चोट के 2, जातिसूचक गालीगलौज के 10 और अन्य 6 मामले शामिल हैं।
हत्या के प्रयास और आगजनी का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। कुल मामलों में 18 अनुसूचित जाति और 9 अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं। बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, 7 मामले पुलिस जांच के अधीन हैं, जबकि एक मामले में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी दी गई।
इसके अलावा 19 मामले न्यायालय में दाखिल होने तथा 19 मामलों के न्यायालय में लंबित होने की जानकारी प्रस्तुत की गई। बैठक में मामलों की जांच के साथ-साथ दोषसिद्धि की दर बढ़ाने और पीड़ितों को नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।