गढचिरोली

जमीन के भूसंपादन की प्रक्रिया कब होगी? मेडीगड्डा प्रकल्पग्रस्त किसानों ने पुछा सवाल

नवभारत डेस्क

गड़चिरोली. तेलंगाना सरकार का महत्वाकांक्षी कालेश्वरम उपसा सिंचाई प्रकल्प अंतर्गत महाराष्ट्र से सटकर बांध का निर्माण किया गया. इसके लिए आवश्यक सिरोंचा तहसील की जमीन तेलंगाना सरकार ने संपादित की. उसमें से कुछ जमीन खरीदी की. किंतु बाकी बची जमीन की भूसंपादन प्रक्रिया बिते 3 वर्षो से प्रलंबित है.

तेलंगाना के इस बहूचर्चित बांध प्रकल्प से सिरोंचा तहसील के अनेक गांवों को प्रतिवर्ष बरसाता के कालावधि में व्यापक फटका लग रहा है. हजारों हेक्टेयर खेत जमीन पानी के निचे बंजर हो रही है. जिस कारण तहसील के किसान निराश हुए है. किंतु महाराष्ट्र सरकार केवल देखने की भूमिका में है. जिससे तेलंगाना की यह मुहजोरी कबतक सहेंगे? ऐसा संतप्त सवाल मेडीगड्डा प्रकल्पग्रस्त किसान पुछ रहे है. 

तेलंगाना राज्य का बहूचर्चित मेडीगड्डा प्रकल्प के कारण सिरोंचा तहसील की करीब 6500 हेक्टेयर खेती बाधित हुई है. अनेक गांव पानी में डूब गए. वहीं प्रतिवर्ष बरसात के कालावधि में वहां का परिसर हमेशा दहशत के साएं में रहता है. उक्त प्रकल्प निर्माण करने के समय 373.80 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी. उसमें से तेलंगाना सरकार तत्काल 234.92 हेक्टेयर जमीन 10.50 लाख एकड़ के तर्ज पर खरीदी की. इसके बाद बांध का निर्माण पूर्ण किया गया. वहीं अन्य बची 938.91 हेक्टेयर अधिग्रहीत जमीन की भूसंपादन प्रक्रिया अबतक नहीं हुई है. इसके लिए इस परिसर के 12 गांवों के किसानों ने अनेक बार सरकारी स्तर पर ज्ञापन पेश किए.

जमीन भूसंपादन के लिए बिते माह अन्यायग्रस्तों ने तहसील कार्यालय के समक्ष आंदोलन भी किया था. इस दौरान प्रशासन ने मांगे पूर्ण करने का आश्वासन दिया. जिसके तहत बाधित जमीन का पूर्नसर्वेक्षण शुरू हुआ. किंतु तेलंगाना सरकार ने बाकी बचे जमीन की भूसंपादन प्रक्रिया पूर्व निश्चित किए गए के तहत न देने का छडयंत्र रचा है. जिस कारण मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे व उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यह उक्त समस्या तत्काल हल कर सिरोंचा तहसील के प्रकल्पग्रस्त किसानों को न्याय दे, ऐसी मांग हो रही है. 

3 वर्षो से भूसंपादन प्रक्रिया थंडेबस्ते में 

बिते 3 वर्षो से बाकी बची 138.91 हेक्टेयर खेतजमिन के भूसंपादन की प्रक्रिया थंडेबस्ते में अटकी है. तेलंगाना सरकार उक्त बची जमीन की भूसंपादन प्रक्रिया पूर्वी निश्चित किए के तहत न करते हुए 2013 के भूसंपादन कानुन के तहत मुआवजा देने की मांग तहसील के किसानों द्वारा हो रही है. किंतु इसपर हल नहीं निकलने से उक्त भूसंपादनाची प्रक्रिया की बंद होने का भय व्यक्त हो रहा है. 

सुपीक जमीन जाने से किसानों पर भुखमरी 

मेडीगड्डा बांध प्रकल्प के कारण तहसील के सैंकड़ों हेक्टेयर सुपीक जमीन पानी में गई है. वहीं प्रतिवर्ष बरसात के कालावधि में निर्माण होनेवाले बाढ़ की स्थिती के कारण सैंकड़ों सुपीक जमीन रेत में दब रही है. जिससे प्रकल्पग्रस्त किसान निरंतर कर्जबाजारी हो रहा है. यही स्थिती कायम होने से परिवार पर भुखमरी की नौबत आयी है. 

राज्य सरकार के मध्यस्थता की आवश्यकता 

देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री रहते समय तेलंगाना राज्य के मेडीगड्डा बांध के निर्माण को अनुमति दी गई थी. फिर वहीं सत्ता में आए है. जिले के तत्कालीन पालकमंत्री अब मुख्यमंत्री है. जिससे अब तो तेलंगाना सरकार की मुहजोरी सहन नहीं करते हुए वे इस विषय पर तेलंगाना सरकार से बातचित कर अन्य जमीन की भूसंपादन प्रक्रिया तत्काल कर मुआवजा दिलाए, ऐसी भावना इस परिसर के संबंधित 12 गांवों के किसानों कह रहे है. 

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