गड़चिरोली के सहपालकमंत्री आशीष जायसवाल को ज्ञापन सौंपते शिवसेना शिक्षक आघाड़ी के पदाधिकारी (फोटो नवभारत) 
गढचिरोली

टीईटी परीक्षा की सख्ती का विरोध, शिवसेना शिक्षक आघाड़ी ने गड़चिरोली के सहपालकमंत्री से की ये मांग

Gadchiroli News: गड़चिरोली में शिक्षक संगठन ने टीईटी परीक्षा की सख्ती पर रोक की मांग की। 2 साल में परीक्षा न उत्तीर्ण करने पर प्रमोशन या नौकरी को खतरा।

आकाश मसने

TET Mandatory: गड़चिरोली जिले में शिक्षकों के लिए टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) परीक्षा अनिवार्य किए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। शिवसेना शिक्षक आघाड़ी ने इस मुद्दे पर गड़चिरोली जिले के सह पालकमंत्री आशीष जायसवाल को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों पर टीईटी की सख्ती न करने की मांग की है।

ज्ञापन में बताया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत सेवानिवृत्ति के पांच साल बाकी रहने वाले सभी शिक्षकों को यह परीक्षा देना अनिवार्य है।

महाराष्ट्र सरकार ने इसके लिए दो वर्ष की समयसीमा निर्धारित की है। यदि शिक्षक इस अवधि में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करते हैं, तो उनके आगामी प्रमोशन या नौकरी पर असर पड़ सकता है, जिससे वे अपने अधिकार और करियर में नुकसान उठा सकते हैं।

टीईटी के लिए बाध्य न किया जाए

शिक्षक संगठन का कहना है कि इस कदम से शिक्षकों के साथ अन्याय होगा। इसलिए उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि टीईटी परीक्षा से शिक्षकों को छूट दी जाए और उन्हें इस परीक्षा के लिए बाध्य न किया जाए। संगठन ने यह भी याद दिलाया कि 2013 से पहले पदभार संभालने वाले शिक्षकों को महाराष्ट्र सरकार ने इस परीक्षा से छूट दी थी, इसलिए मौजूदा शिक्षकों के साथ समानता बनाए रखना जरूरी है। ज्ञापन सौंपते समय शिवसेना शिक्षक आघाड़ी के अध्यक्ष भूषण अलामे, शिक्षक समिति के तहसील अध्यक्ष बंडू शिडाम समेत कई अन्य प्रतिनिधि मौजूद थे। उन्होंने कहा कि टीईटी परीक्षा के दबाव और समयसीमा के कारण शिक्षक मानसिक और पेशेवर तनाव में हैं। इस कदम से न केवल उनके करियर पर असर पड़ेगा बल्कि शैक्षिक प्रणाली में भी असंतोष फैल सकता है।

शिक्षा क्षेत्र और शिक्षकों पर पड़ेगा असर

इसलिए शिक्षक संगठन ने स्पष्ट मांग की है कि सरकार उचित कदम उठाए और शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से मुक्त करे या उनकी परीक्षा उत्तीर्ण करने की बाध्यता को हटा दे। उनका यह भी कहना है कि यदि शिक्षकों के अधिकारों और करियर की सुरक्षा नहीं की गई, तो इसका व्यापक असर शिक्षा क्षेत्र और शिक्षक समुदाय पर पड़ेगा।

यह ज्ञापन शिक्षकों के हित और उनके करियर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है, जिससे सरकार को शिक्षकों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार करना होगा।

शिक्षक संगठन ने कहां है कि, 2013 के पूर्व पदभार संभालने वाले शिक्षकों को महाराष्ट्र सरकार ने उक्त परीक्षा से सहूलियत दी है। ऐसी बात भी ज्ञापन में कहीं है। सहपालकमंत्री को ज्ञापन सौंपते समय शिवसेना शिक्षक आघाडी के अध्यक्ष भूषण अलामे, शिक्षक समिति के देसाईगंज तहसील अध्यक्ष बंडू शिडाम आदि उपस्थित थे।

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