आशा वर्कर आंदोलन तस्वीर- (सोर्सः सोशल मीडिया) 
गढचिरोली

गड़चिरोली में आंगनवाड़ी कर्मियों और आशा वर्करों का मोर्चा, 24 माह का कोरोना भत्ता देने की मांग

ASHA Workers Protest: गड़चिरोली में आंगनवाड़ी कर्मियों और आशा वर्करों ने 24 माह का बकाया कोरोना भत्ता, चार माह का मानधन, पेंशन और ग्रेच्युटी की मांग को लेकर जिला परिषद पर मोर्चा निकाला।

आंचल लोखंडे

Gadchiroli Anganwadi Protest: कोरोना महामारी की कालावधि में जिले की आंगनवाड़ी कर्मी और आशा वर्कर अपनी जान की परवाह न करते हुए सरकार द्वारा दिये गये निर्देश और सूचनाओं का पालन कर सेवा में जुट गयी थी। वहीं सरकार द्वारा संबंधित कर्मियों को कोरोना भत्ता के रूप में प्रति माह 1 हजार रूपये देने की घोषणा भी की गई। लेकिन संबंधित कर्मचारियों को करीब 24 माह का कोरोना भत्ता नहीं मिला है। इस बीच कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बकाया कोरोना भत्ता देने की मांग की।

लेकिन सरकार द्वारा कर्मियों की मांग की ओर अनदेखी किये जाने के कारण कर्मचारियों ने आक्रमक रवैया अपनाते हुए अनेक बार आंदोलन भी किया, लेकिन अब 5 वर्षों की कालावधि वित जाने के बाद भी कर्मचारियों को बकाया भत्ता नहीं मिला है। जिससे सोमवार को आंगनवाडी कर्मी और आशा वर्कर ने जिला परिषद पर मोर्चा निकालकर बकाया कोरोना भत्ता देने की मांग की है।

बकाया भुगतान की उठी मांग

इस आंदोलन का नेतृत्व में रमेशचंद्र दहिवडे, अमोल मारकवार, अरुण भेलके, किशोर जामदार, छाया कागदेलवर, अरुण लाटकर, विठाबाई भट्ट, सुनंदा बावणे ने किया। आंदोलन में गुलशन शेख, राजश्री खोब्रागडे, माया शेडमाके, ललिता केदार, उज्वला उंदीरवाडे, सुमन तोकलवार, रंजना चौकुंडे, भागीरथा दूधबावरे, रजनी चलकलवार, सिंधू मडावी, भारती रामटेके, सरिता आत्राम, छाया कागदेलवार, विश्रांती डोनालकर, कौशल्या गौरकार समेत बडी संख्या में आंगनवाडी कर्मी और आशा वर्कर उपस्थित हुए थे।

यह है आंदोलनकर्ताओं की मांगे

आंदोलनकर्ताओं के शिष्टमंडल द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी को विभिन्न मांगों का ज्ञापन सौंपा गया, जिनमें से लिखित आश्वासन नुसार पेन्शन तथा ग्रेच्युटी लागू करने, मोबाईल पर किये गये कार्यों को प्रोत्साहन भत्ता देने, योजना के अलावा अन्य कार्य आंगनवाड़ी सेविका व मददनीस को न देने, बकाया टी।ए। डी। ए। देने आदि समेत विभिन्न मांगों का समावेश है।

कर्मियों ने चार माह से नहीं मिला मानधन

आंदोलनकर्ताओं ने कहां कि, पहले ही कोरोना भत्ता नहीं मिलने के कारण आंगनवाडी कर्मी और आशा वर्कर को कोरोना भत्ता पाने के लिये संघर्ष करना पड रहा है। ऐसे में पिछले चार माह से संबंधित कर्मचारियो को मानधन नहीं दिया गया है। एक तरफ आंगनवाड़ी महिलाओं को पेंशन दिया जाएगा, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय नुसार आंगनवाड़ी महिलाओं को ग्रेच्युटी लागू किया जाएगा ऐसा लिखित आधासन तीन वर्ष पहले राज्य सरकार ने दिया था। लेकिन तीन वर्षों की कालावधि बीत जाने के बाद भी इसपर अमल नहीं किया गया। जिससे सरकार की निति के प्रति आंगनवाड़ी कर्मियों में तीव्र नाराजगी व्याप्त है।

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