पत्र परिषद में गड़चिरोली के किसान (सोर्स - फोटो नवभारत) 
गढचिरोली

गड़चिरोली एयरपोर्ट भूमि अधिग्रहण विवाद: किसानों ने कहा- स्थायी समाधान नहीं तो होगा बड़ा आंदोलन

Gadchiroli Airport Land Acquisition: गड़चिरोली हवाई अड्डा भूमि अधिग्रहण पर रोक के बावजूद किसान समिति ने चेतावनी दी है कि जीआर रद्द न होने पर अगला आंदोलन सीधे मुख्यमंत्री कक्ष के सामने होगा।

केतकी मोडक

Farmers Protest Warning Over Land Acquisition: गड़चिरोली हवाई अड्डे के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाए जाने के बावजूद यदि इस मुद्दे का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो किसानों का अगला आंदोलन मुख्यमंत्री के कक्ष के सामने किया जाएगा। ऐसी चेतावनी किसान संघर्ष कृती समिति के संयोजक तथा किसान नेता महेंद्र ब्राम्हणवाडे समेत आंदोलनकारी किसानों ने दी है।

आज रविवार को आयोजित पत्र परिषद में महेंद्र ब्राम्हणवाडे ने बताया कि 5 जून को गड़चिरोली जिले के सहपालक मंत्री एड। आशीष जयसवाल ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर जिला प्रशासन की ओर से हवाई अड्डा क्षेत्र की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक संबंधी पत्र किसानों को सौंपा था। इसके बाद देर रात किसानों ने अपना धरना आंदोलन स्थगित कर दिया। हालांकि इस निर्णय को लेकर जिले में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और आंदोलन पर सवाल भी उठने लगे।

शासनादेश (जीआर) रद्द करने की मुख्य मांग

ब्राम्हणवाडे ने कहा कि प्रशासन द्वारा दिए गए पत्र में कहीं भी यह स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि हवाई अड्डे के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को स्थायी रूप से रद्द किया गया है। किसानों की मुख्य मांग भूमि अधिग्रहण संबंधी शासनादेश (जीआर) को रद्द करने की है। यदि सरकार यह मांग स्वीकार नहीं करती, तो किसानों का अगला और निर्णायक आंदोलन मुख्यमंत्री के कक्ष के सामने होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान कुछ राजनीतिक नेताओं ने इसका लाभ उठाने की कोशिश की, जबकि कुछ लोगों ने आंदोलन में फूट डालने का प्रयास किया। इसके बावजूद किसानों ने एकजुट रहकर सरकार के खिलाफ अपनी ताकत दिखाई।

औद्योगिक परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण का विरोध

उल्लेखनीय है कि किसान संघर्ष कृती समिति के नेतृत्व में 4 और 5 जून को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने धरना आंदोलन किया गया था। गड़चिरोली जिले को 'स्टील हब' बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं, एमआईडीसी तथा हवाई अड्डे के लिए उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण के विरोध में किसानों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया था, जिसकी सरकार को गंभीरता से दखल लेनी पड़ी।

सहपालक मंत्री एड. आशीष जयसवाल ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर किसानों की मांगों को समझा और प्रशासन के साथ चर्चा की। इसके बाद उन्होंने किसानों से संवाद कर उचित समाधान निकालने का आश्वासन दिया। साथ ही प्रस्तावित हवाई अड्डा क्षेत्र की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित करने तथा चामोर्शी तहसील के किसानों को आपत्तियां दर्ज कराने के लिए तीन महीने की अतिरिक्त अवधि देने की घोषणा की।

अस्थायी स्थगन को लेकर भ्रम

इस दौरान प्रशासन द्वारा जारी पत्र में "अस्थायी स्थगन" शब्द का प्रयोग किए जाने से किसानों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है। किसानों का कहना है कि खेती के मौसम में भी उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर उतरना पड़ा। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के कारण उनका काफी समय बर्बाद हुआ, तेंदूपत्ता सीजन प्रभावित हुआ और जमीन छिन जाने की आशंका से कई किसान मानसिक तनाव व बीमारी का शिकार हो गए।

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