Highlights:
गड़चिरोली में पुराने बारीक धान की कीमत 4,200 रुपए से बढ़कर 5,500 रुपए तक पहुंच गई है।
सामान्यतः एक एकड़ में 20 बोरी धान के मुकाबले इस वर्ष कई खेतों में केवल 10 से 12 बोरी उत्पादन हुआ है।
तना छेदक, करपा रोग और तुडतुड़ा के कारण धान की फसल प्रभावित हुई है।
Paddy Price Hike Maharashtra: इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव और कम बारिश के कारण महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। गड़चिरोली जिले के 2 तहसीलों को भी सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया गया है।
इसका सीधा असर धान उत्पादक किसानों पर पड़ा है। जिले में बारहमासी बहने वाली नदियां होने के बावजूद पर्याप्त सिंचाई सुविधाओं के अभाव में किसानों को बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। इस वर्ष बारिश में लंबे अंतराल के कारण धान के उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
उत्पादन में कमी और बाजार में मांग बढ़ने से धान के व्यापारी अब सीधे किसानों के खेतों और खलिहानों तक पहुंच रहे हैं। कई क्षेत्रों में व्यापारी किसानों को धान की अग्रिम खरीद सके लिए पहले ही रकम दे रहे हैं।
वहीं, धान की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन कम उपज और बढ़ती खेती की लागत के कारण उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बना हुआ है। एचएमटी, श्रीराम तथा सुंदर जैसी बारीक किस्मों के धान की बाजार में अधिक मांग है। इसके चलते इन किस्मों की किमतों में लगातार वृद्धि हो रही है।
व्यापारियों के अनुसार, आठ दिन पहले पुराने बारीक धान का भाव 4,200 रुपए था, जो अब बढ़कर 5,500 रुपए तक पहुंच गया है। आनेवाले दिनों में भी कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। - मोटे धान के भाव में भी तेजी देखी जा रही है। धान की मांग बढ़ने के कारण व्यापारी किसानों से सीधे संपर्क कर रहे हैं।
कुछ क्षेत्रों में किसान त्योहारों के दौरान अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अग्रिम रकम ले रहे हैं। वहीं, कुछ किसानों को धान की उठाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही भुगतान किया जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि चावल की बढ़ती मांग के कारण पुराने धान के दाम में तेजी आई है।
एक ओर धान के भाव बढ़ रहे हैं, तो दूसरी ओर किसानों को कम उत्पादन के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस वर्ष कम बारिश और मौसम में बदलाव के चलते धान की फसल पर तना छेदक कीट, करपा रोग और तुडतुड़ा जैसे कीट-रोगों का प्रकोप देखा गया है। इससे फसल की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हुआ है।
किसानों के अनुसार, सामान्य वर्षों में जहां एक एकड़ में लगभग 20 बोरी धान का उत्पादन होता था, वहीं इस वर्ष कई खेतों में उत्पादन घटकर केवल 10 से 12 बोरी रह गया है। इसके अलावा खेत की तैयारी, फसल की देखभाल, कटाई और बंधाई पर होने वाला खर्च भी बढ़ गया है। ऐसे में धान की कीमतों में वृद्धि के बावजूद किसानों को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा है।
किसान दीपक कोटगले ने कहा कि इस वर्ष बारीक धान के भाव बढ़ना अच्छी बात है। लेकिन धान की फसल पर रोगों के प्रकोप और बहुत कम बारिश के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आई है। ऐसे में कीमतें बढ़ने के बावजूद हमारी आर्थिक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।
धान व्यापारी तुलसीदास लाकड़े ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में धान उत्पादक किसान त्योहारों के दौरान अग्रिम रकम लेकर जाते है। वहीं, कुछ किसानों को धान की उठाव प्रक्रिया से पहले ही भुगतान करना पड़ता है। चावल की मांग बढ़ने से पुराने धान के भाव में तेजी आई है। कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए कुछ व्यापारी शर्तों के आधार पर भी किसानों को अग्रिम रकम दे रहे है।