Gadchiroli SRI Paddy Farming: गड़चिरोली जिले के दुर्गम भामरागड़ तहसील के जिजगांव निवासी सीताराम मड़ावी के जल संरक्षण, जल प्रबंधन और टिकाऊ खेती के कार्यों की अब राष्ट्रीय स्तर पर सुध ली गई है। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने उन्हें 9 वें भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह-2026 के उद्घाटन सत्र के लिए नई दिल्ली आमंत्रित किया है।
इससे दुर्गम क्षेत्र के एक किसान द्वारा खेतों में किए गए प्रयोगों और अनुभवों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला है। भारत अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह का आयोजन 22 से 26 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में किया जाएगा।
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘जलवायु परिवर्तन के प्रति सक्षम और लचीला जल प्रबंधन’ रखी गई है। 22 सितंबर को सुबह 11 बजे उद्घाटन सत्र आयोजित होगा। इस सत्र में मड़ावी को उपस्थित रहकर अपने अनुभव साझा करने और संबोधित करने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।
सीताराम मड़ावी के अनुसार, शुरुआत में पानी की कमी के कारण क्षेत्र की जमीन सूखी रहती थी। इसके बाद खेतों का निरीक्षण कर किसानों, अधिकारियों और संबंधित लोगों के साथ चर्चा की गई। पानी का उचित उपयोग, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल पर उन्होंने मार्गदर्शन किया। उनके मार्गदर्शन में खेती में विभिन्न पद्धतियों को अपनाया गया। इससे कई किसानों को लाभ हुआ।
पानी का बेहतर नियोजन और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से सूखी जमीन पर दोबारा हरियाली लाने के प्रयास शुरू हुए। मड़ावी के कृषि कार्यों की इससे पहले भी चर्चा हो चुकी है। वर्ष 2014 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, जिजगांव के सीताराम व्यंक मड़ावी ने वर्ष 2006 से धान की सघन खेती पद्धति (एसआरआई) अपनाई थी। उनके अनुसार, उस समय गांव के 115 परिवारों में से 100 परिवारों ने इस पद्धति को अपनाया था। इस पद्धति से प्रति एकड़ औसतन 22 क्विंटल उत्पादन मिलने का भी उल्लेख किया गया था।
गड़चिरोली के अतिदुर्गम और आदिवासी बहुल क्षेत्र से सामने आए सीताराम मड़ावी के कार्यों की केंद्र सरकार द्वारा ली गई सुध को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पानी, खेती और ग्रामीण जीवन से जुड़े प्रत्यक्ष अनुभव रखनेवाले एक स्थानीय किसान को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के जल संबंधी विमर्श के मंच पर अपने अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा।