Sambhajinagar Child Trafficking Case: महज एक माह के बच्चे को पहले 1.20 लाख रुपये में बेचा गया और इसके बाद उसकी तीन बार खरीद-फरोख्त कर कीमत बढ़ाई जाती रही। अंततः करीब 3.50 लाख रुपये में उसका सौदा हैदराबाद में किया गया।
मुकुंदवाड़ी पुलिस ने इस अंतरराज्यीय बाल तस्करी मामले का पर्दाफाश करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तीन दिन पहले सामने आए इस मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया। बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे संरक्षण संस्था को सौंप दिया गया है।
पुलिस जांच के अनुसार, मुकुंदवाड़ी क्षेत्र में साथ रह रहे बच्चे के माता-पिता ने कथित रूप से उसका पहला सौदा 1.20 लाख रुपये में किया। इसके बाद बिचौलियों के माध्यम से बच्चा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता गया। इस दौरान उसकी दोबारा खरीद-फरोख्त हुई और अंत में करीब 3.50 लाख रुपये में उसे हैदराबाद पहुंचाया गया।
मामले की गंभीरता इस बात से सामने आती है कि जन्म के कुछ ही समय बाद बच्चे को अलग-अलग लोगों के बीच सौदे का हिस्सा बना दिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
गिरफ्तार आरोपियों में बच्चे के माता-पिता के अलावा सीमा रेशवाल, कौशल्या पवार, संगीता आव्हाड निवासी पडेगांव, डॉ. सुरेश गुंटुका निवासी तेलंगाना और उमा गंगाधर खटकम निवासी हैदराबाद शामिल हैं। बच्चे के माता-पिता के नाम पुलिस द्वारा जारी जानकारी में उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, डॉ. सुरेश गुंटुका मामले में प्रमुख भूमिका निभा रहा था। वह बारहवीं तक पढ़ा है और अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर तेलंगाना में चिकित्सक के रूप में काम कर रहा था। शहर के एक आईवीएफ केंद्र में मरीज लाने के सिलसिले में उसका आना-जाना था। इसी संपर्क के दौरान बच्चे को लेने की बात सामने आई।
जांच में सामने आया कि उमा ने बच्चे को करीब एक माह 22 दिन तक अपने पास रखा था। इसी दौरान मामले में पुलिस कार्रवाई शुरू होने की जानकारी मिलने पर वह घबरा गई। इसके बाद रविवार को डॉ. गुंटुका और उमा बच्चे को लेकर मुकुंदवाड़ी थाने पहुंचे और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित कब्जे में लेकर बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया। समिति के आदेश के बाद बच्चे को साकार संस्था के संरक्षण में भेज दिया गया।
पुलिस को इस मामले की जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी। पिछले चार दिनों में पुलिस ने बच्चे के संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटाई और लेनदेन की कड़ियां जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई। जांच में सामने आया कि मामला केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार तेलंगाना और हैदराबाद तक जुड़े थे।
सात आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चे की खरीद-फरोख्त के पीछे आर्थिक लेनदेन किस तरह हुआ और इसमें अन्य बिचौलियों की क्या भूमिका रही। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने इससे पहले किसी अन्य बच्चे को भी इसी तरह खरीदा या बेचा था या नहीं।
नवजात बच्चे की तीन बार खरीद-फरोख्त और उसे अंतरराज्यीय स्तर पर ले जाने की घटना ने शहर में बाल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की आगे की जांच से इस नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम सामने आने की संभावना है।