छत्रपति संभाजीनगर के जसवंत सिंहपुरा की सूत मिल की जमीन पर मैदान विकसित करने की पहल।
कचरा हटाने और समतलीकरण का काम वक्फ बोर्ड की आपत्ति के बाद रुका।
वक्फ बोर्ड ने मनपा आयुक्त अमोल येडगे को पत्र भेजकर जताई आपत्ति।
विपक्ष के नेता समीर बिल्डर ने 25 वर्षों से जमीन की अनदेखी पर उठाए सवाल।
जमीन पर मैदान के आरक्षण और न्यायालय द्वारा गठित समिति का भी उल्लेख।
Chhatrapati Sambhajinagar Girni Maidan Waqf Board NMC Dispute: छत्रपति संभाजीनगर के रोशन गेट क्षेत्र स्थित जसवंत सिंहपुरा की सूत मिल की खाली जमीन पर मैदान विकसित करने को लेकर मनपा और वक्फ बोर्ड आमने-सामने आ गए हैं। मनपा ने कचरा हटाकर जमीन के समतलीकरण का काम शुरू किया था, लेकिन वक्फ बोर्ड की आपत्ति के बाद काम रोक दिया गया। वहीं, विपक्ष के नेता समीर बिल्डर ने सवाल उठाया कि 25 वर्षों से उपेक्षित जमीन की सुध अब तक क्यों नहीं ली गई।
छत्रपति संभाजीनगर, पुराने शहर के रोशन गेट क्षेत्र में बच्चों को खेलने के लिए मैदान उपलब्ध कराने की पहल जमीन के अभिलेखों और विकास प्रक्रिया को लेकर विवाद में घिर गई है। जसवंत सिंहपुरा स्थित सूत मिल की खाली जमीन पर वर्षों से जमा कचरे को हटाकर मैदान विकसित करने के लिए महानगरपालिका ने समतलीकरण का काम शुरू किया था। हालांकि, वक्फ बोर्ड की आपत्ति के बाद काम रोक दिया गया।
वक्फ बोर्ड ने मनपा आयुक्त अमोल येडगे को पत्र भेजकर कहा है कि उसकी सलाह और परामर्श के बिना जमीन पर विकास कार्य शुरू करना उचित नहीं है। अब मैदान की जरूरत के साथ-साथ जमीन की स्थिति और विकास कार्य की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
जसवंत सिंहपुरा स्थित सूत मिल की खुली जमीन लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी है। यहां कचरे के ढेर जमा होने और जमीन की बदहाली को देखते हुए इसे मैदान के रूप में विकसित करने की पहल की गई थी। लेकिन वक्फ बोर्ड की आपत्ति के बाद काम रोकना पड़ा।
बोर्ड ने विकास कार्य शुरू करने से पहले संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा करने की जरूरत पर जोर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद जमीन के स्वामित्व, अभिलेखों और विकास प्रक्रिया को लेकर प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
मनपा के विरोधी पक्ष नेता समीर बिल्डर ने वक्फ बोर्ड की आपत्ति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जसवंत सिंहपुरा की सूत मिल की जमीन के संबंध में न्यायालय ने एक समिति गठित की है और इस जमीन पर पहले से ही मैदान के लिए आरक्षण है।
बिल्डर के अनुसार, जमीन करीब 25 वर्षों से खाली पड़ी थी। वहां कचरे के ढेर जमा थे और नशा करने वालों की गतिविधियों की शिकायतें भी थीं। उन्होंने सवाल किया कि जब इतने वर्षों तक जमीन उपेक्षित रही, तब वक्फ बोर्ड ने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया।
क्षेत्र में बच्चों के खेलने के लिए मैदान उपलब्ध कराने की मांग के बीच अब जमीन की कानूनी स्थिति और विकास कार्य की प्रक्रिया स्पष्ट होना जरूरी है। एक ओर स्थानीय जरूरतों के अनुरूप मैदान विकसित करने की मांग है, तो दूसरी ओर वक्फ बोर्ड ने परामर्श के बिना काम शुरू करने पर आपत्ति जताई है।
फिलहाल विकास कार्य रुकने के बाद आगे की कार्रवाई संबंधित अभिलेखों, समिति की भूमिका और प्रशासनिक परामर्श पर निर्भर करेगी।