चेयरमैन के बिना योजना बन रही ‘निराधार’ (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
चंद्रपुर

चेयरमैन के बिना योजना बन रही ‘निराधार’, कमेटी गठन में बड़ा अड़ंगा,मुश्किल में बेसहारा बुजुर्ग

Government Welfare Scheme:संजय गांधी निराधार योजना में कमेटी अध्यक्ष की नियुक्ति न होने से चंद्रपुर सहित कई जिलों में हजारों जरूरतमंदों को राहत नहीं मिल पा रही है।

आंचल लोखंडे

Niradhar Yojana Chandrapur: संजय गांधी निराधार अनुदान योजना हजारों जरूरतमंद लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा है। इसमें नेत्रहीन, दिव्यांग, अनाथ, गंभीर रूप से बीमार लोग और तलाकशुदा महिलाएं सहित कई लाभार्थी शामिल होते हैं।

लेकिन राज्य के कई जिलों में पिछले कई महीनों से यह योजना अध्यक्ष की नियुक्ति न होने के कारण ठप पड़ी हुई है। इससे बेसहारा व जरूरतमंद लोग परेशान हैं। सत्ताधारियों की ओर से भी प्रयास न होने के कारण यह सवाल उठ रहा है कि कमेटी का गठन आखिर कब होगा?

कामकाज बगैर अध्यक्ष के संचालित

पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार का गठन हुआ और अब नगर निगम के चुनाव भी संपन्न हो चुके हैं। इसके बावजूद यह योजना लंबे समय से बिना अध्यक्ष के ही चल रही है। यह गंभीर प्रश्न है कि इतनी महत्वपूर्ण कमेटी को नेतृत्व कब मिलेगा? संजय गांधी निराधार योजना, श्रावणबाल निराधार योजना, इंदिरा गांधी विधवा योजना, इंदिरा गांधी वृद्धावस्था योजना और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना जैसी कई सामाजिक योजनाएं लगातार चल रही हैं। संजय गांधी निराधार योजना कमेटी में अध्यक्ष सहित नौ सदस्य होते हैं और यही कमेटी लाभार्थियों के आवेदनों को मंजूरी देती है।

योजना लाभ की ‘कछुआ चाल’

अध्यक्ष और सदस्यों की अनुपस्थिति के चलते कमेटी का तात्कालिक प्रशासन तहसीलदारों को सौंपा गया है। तहसीलदारों ने कुछ आवेदनों को मंजूरी जरूर दी है, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वास्तविक गति तभी आएगी जब कमेटी का गठन पूरी तरह से हो जाएगा।

सिफारिश के अभाव में अटका अध्यक्ष पद

नई सरकार के मंत्रियों द्वारा कमेटी के अध्यक्ष व सदस्यों की सिफारिश अभी तक नहीं की गई है, जिसके कारण नियुक्ति प्रक्रिया अटकी पड़ी है। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के कई सरकारी लाभ संबंधित काम रुके हुए हैं।

संजय गांधी निराधार योजना

पिछले वर्ष 15 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हुई थी। 23 नवंबर को चुनाव परिणाम घोषित हुए, 5 दिसंबर को मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री ने शपथ ली और 17 दिसंबर को कैबिनेट विस्तार भी पूरा हुआ। फिर भी अनेक जिलों में कमेटी अध्यक्ष की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है जो बेहद गंभीर विषय है।

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