विधायक सुधाकर अडबाले (सौजन्य-नवभारत) 
चंद्रपुर

आखिरकार विधायक अडबाले हुए 'कांग्रेसी', चचेरे भाई के लिए पहना कांग्रेस का दुपट्टा

Chandrapur Politics: विधायक सुधाकर अडबाले अपने चचेरे भाई सुरेंद्र अडबाले के लिए नगीनाबाग प्रभाग में कांग्रेस का प्रचार कर रहे हैं। भाजपा के साथ 'गुप्त समझौते' की भी चर्चा।

प्रिया जैस

Chandrapur News: विधान परिषद के निर्दलीय शिक्षक विधायक सुधाकर अडबाले अपने चचेरे भाई सुरेंद्र विठ्ठलराव अडबाले के प्रचार के लिए चुनावी मैदान में उतर गए हैं। अब तक स्वयं को निर्दलीय विधायक बताते हुए कांग्रेस नेताओं को बार-बार यह याद दिलाने वाले विधायक अडबाले, भाई के लिए कांग्रेस का दुपट्टा गले में डालकर खुलकर प्रचार करते नजर आ रहे हैं।

मनपा चुनाव में कांग्रेस के लिए हाथ जोड़कर वोट मांगते हुए वे वार्ड-वार्ड घूम रहे हैं, जिससे कांग्रेस नेताओं में उत्साह का माहौल है। मनपा चुनाव में नगीनाबाग प्रभाग क्रमांक 9 से विधायक सुधाकर अडबाले ने अपने चचेरे भाई, शिक्षक सुरेंद्र अडबाले के लिए कांग्रेस से उम्मीदवारी की मांग की थी। कांग्रेस नेताओं की टिकट वितरण से जुड़ी सभी बैठकें विधायक अडबाले के निवास पर ही हुईं।

इसी वजह से सुरेंद्र अडबाले को कांग्रेस का प्राथमिक सदस्य न होते हुए भी घर बैठे टिकट मिल गया। अब टिकट मिलने के बाद वार्ड में वोट मांगने के लिए प्रचार करना जरूरी हो गया है, और इसी कारण शिक्षक भाई के लिए खुद शिक्षक विधायक अडबाले चुनाव प्रचार में सक्रिय हो गए हैं।

कांग्रेस समर्थित शिक्षक विधायक

गौरतलब है कि सुधाकर अडबाले कांग्रेस समर्थित शिक्षक विधायक हैं। विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने उन्हें समर्थन दिया था, लेकिन पार्टी नेताओं का कहना है कि अडबाले को यह समर्थन अक्सर याद नहीं रहता और वे समय-समय पर खुद को निर्दलीय विधायक बताने से नहीं चूकते। अब भाई के लिए उन्हें सीधे कांग्रेस का प्रचार करना पड़ रहा है। सुरेंद्र अडबाले के साथ विधायक अडबाले को प्रभाग में घूमते हुए देखा जा रहा है।

दूसरी ओर, इसी प्रभाग में भाजपा के पूर्व महानगर जिला अध्यक्ष राहुल पावड़े और विधायक अडबाले के बीच कथित गुप्त गठजोड़ की चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोरों पर है। पावड़े ने इसी प्रभाग से खुले वर्ग से उम्मीदवारी दाखिल की है, जबकि अडबाले के भाई पिछड़ा वर्ग नागरिक कोटे से उम्मीदवार हैं।

दोनों एक-दूसरे की परोक्ष रूप से मदद कर रहे हैं, ऐसी चर्चा भाजपा और कांग्रेस के खेमों में दबे स्वर में चल रही है। इस कथित सहयोग का लाभ दोनों को होगा या केवल किसी एक को, यह 16 जनवरी को आने वाले चुनाव परिणाम के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है कि शिक्षक भाई के लिए शिक्षक विधायक खुद चुनावी मैदान में उतर आए हैं।

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