चंद्रपुर जिले में कुपोषण की स्थिति (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
चंद्रपुर

चंद्रपुर जिले में कुपोषण की स्थिति चिंताजनक, चिमूर तहसील में मिले सर्वाधिक 18 अति गंभीर कुपोषित बच्चे

Chandrapur ICDS Survey News: चंद्रपुर में ICDS सर्वे के अनुसार 146 बच्चे अति गंभीर कुपोषित मिले हैं। चिमूर में सर्वाधिक मामले दर्ज हुए, जबकि सरकार EDNF के जरिए स्थिति सुधारने का प्रयास कर रही है।

रूपम सिंह

Chandrapur Child Health ICDS Survey News: चंद्रपुर कुपोषण मुक्त समाज के लिए सरकार द्वारा अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं, फिर भी कुपोषण पूरी तरह खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। चंद्रपुर जिला भी इससे अछूता नहीं है। आंगनवाड़ी द्वारा फरवरी 2026 तक किए गए सर्वेक्षण में 66,272 बच्चों में से 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के 146 बच्चे अति गंभीर कुपोषित पाए गए हैं।

यह सर्वेक्षण एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (ICDS Survey) के अंतर्गत किया गया। सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जाने के बावजूद कुपोषण को 100 प्रतिशत समाप्त करने में सफलता नहीं मिली है। जिले की 2,447 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 0 से 5 वर्ष के बच्चों का वजन लेकर सर्वेक्षण किया गया।

चिमूर तहसील सबसे आगे

चिमूर तहसील में कुपोषित बच्चों की संख्या सबसे अधिक पाई गई है। यहां 251 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 6,285 बच्चों का सर्वेक्षण किया गया, जिसमें 5,473 बच्चे सामान्य, 689 बच्चे कम वजन वाले, 123 बच्चे गंभीर कम वजन वाले, 178 मध्यम कुपोषित, 18 अति गंभीर कुपोषित पाए गए, वहीं, सबसे कम अति गंभीर कुपोषित कुपोषित बच्चे बल्लारपुर तहसील में मिले। यहां 73 आंगनवाड़ी केंद्रों है। में 1,682 बच्चों का सर्वे हुआ, जिसमें 1,569 सामान्य, 98 कम वजन वाले, 15 गंभीर कम वजन वाले, 12 मध्यम कुपोषित, 4 अति गंभीर कुपोषित पाए गए

व्यवहार और मानसिक लक्षण

लगातार थकान और ऊर्जा की कमी, भोजन में रुचि न होना, चिड़चिड़ापन या उदासी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, बार-बार संक्रमण होना

छोटे बच्चों में विशेष संकेत

वजन और लंबाई का न बढ़ना, बच्चे का अत्यधिक रोना या बहुत शांत रहना, मानसिक और शारीरिक विकास में देरी, ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य कर्मचारी या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कुपोषण के प्रमुख लक्षण इस प्रकार है।

उम्र के अनुसार लंबाई और वजन न बढ़ना, लगातार थकान, भूख न लगना, त्वचा का रूखापन, बाल पतले होना, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना, बार-बार बीमार पड़ना, चिड़‌चिड़ापन और एकाग्रता की कमी। गंभीर कुपोषण के लक्षणों में शरीर में सूजन, मांसपेशियां कमजोर होना, घाव देर से भरना। सरकारी पहल हर महीने कुपोषित बच्चों की पहचान की जाती है। अति गंभीर कुपोषित बच्चों को सरकार द्वारा -एनर्जी डेंस न्यूट्रीशन फूड (EDNF)-उपलब्ध कराया जाता है। भागवत तांबे, उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (महिला एवं बाल कल्याण), चंद्रपुर

फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार स्थिति

श्रेणी बच्चों की संख्या
सामान्य बच्चे 58,455
कम वजन वाले बच्चे 6,694
गंभीर रूप से कम वजन 1,103
अति गंभीर कुपोषित 146
मध्यम कुपोषित 1,208

POWERGRID Vacancy 2026: अप्रेंटिस के 270 पदों पर भर्ती, 25 अगस्त से आवेदन शुरू; जानें योग्यता व स्टाइपेंड

आज की ताजा खबर 22 अगस्त LIVE: पटना में PhD छात्रों का विरोध प्रदर्शन; दिल्ली में बीजेपी की आज तीन अहम बैठकें

अखिलेश यादव ने गिनाए परिवारवाद के फायदे, बताया- आखिर क्यों नहीं टूटी समाजवादी पार्टी

महाराष्ट्र में होगा जंतर मंतर से बड़ा आंदोलन! कांग्रेस सांसद का बड़ा दावा, बोलीं- हम जेल भी जाने को तैयार हैं

वंदे मातरम् पर BJP का बड़ा वार, कांग्रेस के 1937 वाले फैसले के खिलाफ पारित किया प्रस्ताव