जलवायु परिवर्तन (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
चंद्रपुर

चंद्रपुर में बरसेगी 'आग'! महाराष्ट्र के सबसे गर्म जिले पर आई चौंकाने वाली रिपोर्ट, 2 डिग्री बढ़ेगा तापमान

Chandrapur Temperature: चंद्रपुर होगा महाराष्ट्र का सबसे गर्म जिला! 2050 तक 2 डिग्री बढ़ेगा पारा। प्रो. सुरेश चोपने ने दी भीषण हीटवेव और बादल फटने जैसी घटनाओं की चेतावनी।

प्रिया जैस

Climate Change Maharashtra Report: सेंटर फॉर साइंस टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी नामक शोध संस्थान ने महाराष्ट्र के सभी जिलों का अध्ययन करने के बाद चौंकाने वाली रिपोर्ट दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों की तुलना में गर्मियों और सर्दियों के तापमान में वृद्धि होगी। 2021-2050 के बीच तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

शनिवार (22 मार्च) को केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सदस्य प्रो. सुरेश चोपने ने बताया कि बदलती जलवायु का बाढ़, कृषि, वन, वन्यजीव, स्वास्थ्य और विकास कार्यों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उनके अनुसार वर्ष 2022 की तरह ही 2026 में भी चंद्रपुर जिले में सर्वाधिक गर्मी पड़ेगी।

खतरे की चेतावनी

बेंगलुरु और नोएडा स्थित विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नीति केंद्र ने जनवरी 2022 में महाराष्ट्र के सभी जिलों के लिए यह रिपोर्ट जारी की। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और आईपीसीसी के आंकड़ों के आधार पर, 1990 से 2019 तक पिछले 30 वर्षों की तुलना में, वर्ष 2021-2050 में वायु प्रदूषण में मध्यम और उच्च वृद्धि का महाराष्ट्र की जलवायु पर प्रभाव पड़ने का अनुमान है। महाराष्ट्र के लिए सभी जिलावार पूर्वानुमान भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), आईपीसीसी और कोर्डेक्स मॉडल के आंकड़ों का उपयोग करके बनाए गए हैं। भारत पहले से ही जलवायु जोखिम सूचकांक में 7वें स्थान पर तथा प्राकृतिक आपदा सूचकांक में तीसरे स्थान पर है, इसलिए यह रिपोर्ट एक गंभीर चेतावनी है।

अध्ययन के अनुसार चंद्रपुर की तापमान स्थिति

चंद्रपुर जिले के एक अध्ययन से पता चलता है कि पिछले कई वर्षों की तुलना में चंद्रपुर में हीट वेव की घटनाओं में वृद्धि हुई है, लेकिन अच्छी खबर यह है कि 2021 से 2050 के बीच चंद्रपुर में हीट वेव के दिनों की संख्या में कुछ कमी आने की संभावना है। लेकिन मौसम विभाग के अध्ययन में अत्यधिक तीव्र गर्मी की लहरों की संभावना बढ़ने की भविष्यवाणी की गई है। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण वर्ष की पहली छमाही में चंद्रपुर का औसत तापमान अन्य जिलों की तुलना में 0.8 डिग्री कम रहेगा। अतः अगले चरण में तापमान 1.2 डिग्री बढ़ जाएगा। अध्ययन में यह भी अनुमान लगाया गया है कि सर्दियों में तापमान में भी 1.5 से 2.4 डिग्री की वृद्धि होगी।

बरसात के दिनों में और बढोत्तरी

बढ़ते प्रदूषण के कारण 2010-2050 तक चंद्रपुर में बारिश के दिनों की संख्या 7 दिन बढ़ जाएगी। लेकिन दूसरे चरण में बारिश के दिनों की संख्या घटकर 6 दिन रह जायेगी। खरीफ सीजन के दौरान, पहले वर्ष में रिटर्न की दर 8% और बाद के वर्षों में 17% बढ़ जाएगी। लेकिन रबी सीजन में यह अनुपात पहले वर्ष में 10% और बाद के वर्षों में 20% बढ़ जाएगा। चंद्रपुर में प्रारंभिक अवधि में भारी वर्षा की 2 घटनाएं तथा बाद की अवधि में प्रति वर्ष 3 घटनाएं घटेंगी। आने वाले समय में बादल फटने जैसी घटनाएं घटने वाली हैं।

सूखे वाले वर्ष कम होंगे

पिछले 30 सालों में भारी बारिश के 114 मामले आए, लेकिन अगर प्रदूषण बढ़ता रहा तो 180 मामले होंगे और भारी प्रदूषण के बाद 212 मामले होंगे। इसके अलावा पिछले 30 सालों में बादल फटने जैसी कई घटनाएं हुई हैं। घटनाओं की संख्या, जो पहले 36 थी, बढ़कर 56 हो गयी तथा बाद में 85 हो गयी। चोपने ने बताया कि पिछले 30 वर्षों में 12 वर्ष कम वर्षा वाले रहे हैं, जो घटकर 10 वर्ष रह जाएंगे, जिसका अर्थ है कि सूखे के वर्षों में कमी आएगी।

कारण और समाधान

विश्व के सभी देशों में उद्योग के तीव्र विकास के कारण प्रदूषण और उससे उत्सर्जित प्रदूषणकारी गैसों, विशेषकर कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ गई है। वन, जो तापमान को कम रखते हैं और कार्बन उत्सर्जन को कम करते हैं, विकास कार्यों के लिए काटे जा रहे हैं। बढ़ती आबादी के कारण, भूमि पर बढ़ते शहर, गांव और विकास कार्यों के कारण भूमि का मरुस्थलीकरण हो रहा है।

इसके कारण शहरी गर्मी और क्षेत्र में तापमान बढ़ रहा है। आज जो वैश्विक तापमान बढ़ा है, वह अगले 10 वर्षों तक फिर से कम नहीं होगा, चाहे कितने भी प्रयास किए जाएं। हालांकि, तात्कालिक उपायों में उद्योगों और थर्मल पावर स्टेशनों से निकलने वाले वायु और जल प्रदूषण को कम करना, शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना, ग्रामीण क्षेत्रों में, सड़कों, रेलमार्गों और कृषि क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पेड़ लगाना, वन क्षेत्र की मात्रा बढ़ाना और छोटे बांधों और झीलों जैसे जल भंडारों को बढ़ाना शामिल है।

प्रकृति आधारित जीवनशैली अपनाने जैसे अनेक प्रयासों के बाद ही स्थानीय जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए वैश्विक प्रयास किए जा सकेंगे। इसके लिए सरकार को राज्य स्तर पर जलवायु परिवर्तन की सीमा का अध्ययन करना चाहिए, कार्ययोजना बनाकर उसे लागू करना चाहिए तथा जलवायु परिवर्तन के कारणों को तत्काल कम करना चाहिए, ऐसा भी प्रो. चोपने ने कहा।

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