किसान प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स-सोशल मीडिया )  
चंद्रपुर

अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा अन्नदाता, चंद्रपुर में किसानों की मांग, कृषि सामानों पर मिले 50% सब्सिडी

50% Subsidy Demand Chandrapur: चंद्रपुर में मानसून की शुरुआत संग खाद, बीज व डीजल के दामों में उछाल से किसान संकट में हैं। लागत 3-4 गुना बढ़ने से किसानों ने कृषि सामग्री पर 50% अनुदान मांगा है।

केतकी मोडक

Chandrapur Farmers Seed Fertilizer Price Hike: चंद्रपुर मानसून की शुरुआत और खरीफ सीजन सिर पर होने के बीच रासायनिक खाद, बीज, खरपतवारनाशक तथा ईंधन की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी ने किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। एक ओर प्रकृति की अनिश्चितता और दूसरी ओर खेती में उपयोग होने वाली सामग्रियों की आसमान छूती कीमतों ने कृषि का पूरा आर्थिक संतुलन बिगाड़ दिया है। "देश का अन्नदाता" कहलाने वाला किसान आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करता दिखाई दे रहा है।

पिछले 10 से 15 वर्षों में खेती के लिए आवश्यक सामग्री की कीमतें 3-4 गुना तक बढ़ चुकी हैं। डीजल की कीमत प्रति लीटर 60 रुपये से बढ़कर 100 रुपये के पार पहुंच गई है। वहीं ट्रैक्टर की कीमत 4 से 5 लाख रुपये से बढ़कर 8 से 9 लाख रुपये तक पहुंचने से खेती की जुताई और अन्य कार्यों का खर्च काफी बढ़ गया है। इसके अलावा बाजार में नामी कंपनियों के नाम पर नकली खाद, बीज और कीटनाशकों की बिक्री होने से किसानों के साथ धोखाधड़ी के मामले भी सामने आ रहे हैं। शिकायतें हैं कि खाद में मिट्टी, नमक और रंग मिलाकर बेचा जा रहा है। ऐसे में किसान महंगाई और मिलावटी कृषि सामग्री की दोहरी मार झेल रहा है।

खाद और खरपतवारनाशकों के बढ़े दाम

पिछले एक दशक में खाद की कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। डीएपी खाद की कीमत 480 रुपये से बढ़कर 1,350 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं 10:26:26 तथा 12:32:16 खाद की बोरी की कीमत 434-445 रुपये से बढ़कर सीधे 2,450 रुपये तक पहुंच गई है। खरपतवारनाशकों की कीमतों में भी तेजी आई है। कुछ वर्ष पहले 250 से 300 रुपये प्रति किलो मिलने वाला खरपतवारनाशक अब 700 से 850 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं द्रवरूप (तरल) खरपतवारनाशकों की कीमत 1 हजार रुपये से बढ़कर 2 से 3 हजार रुपये प्रति लीटर तक हो गई है। मजदूरी दरों में भी बढ़ोतरी हुई है। महिला मजदूरों को प्रतिदिन लगभग 300 रुपये तथा पुरुष मजदूरों को 500 रुपये तक का भुगतान करना पड़ रहा है। खाद छिड़काव के लिए भी प्रति बोरी 60 से 90 रुपये खर्च होने से उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई है।

खरपतवारनाशकों के दाम भी तीन गुना

कुछ वर्ष पहले 250 से 300 रुपये प्रति किलो मिलने वाले खरपतवारनाशकों की कीमत अब 700 से 850 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं अच्छी गुणवत्ता वाले तरल खरपतवारनाशकों की कीमत 1 हजार रुपये से बढ़कर सीधे 2 से 3 हजार रुपये प्रति लीटर हो गई है। कुल मिलाकर खाद-बीज की कमी, आसमान छूती कीमतें और मिलावटखोरों पर प्रशासन की कमजोर कार्रवाई के कारण इस वर्ष का खरीफ सीजन किसानों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और महंगा साबित होने की आशंका जताई जा रही है।

किसान बचेगा तभी देश बचेगा

कोठारी प्रगतिशील किसान अशोक मोरे "वर्तमान परिस्थितियों में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि खेती कैसे करें और उसे लाभकारी कैसे बनाए रखें। यदि प्रकृति साथ दे तो फसल हाथ आती है, अन्यथा किसान कर्ज के बोझ तले दब जाता है और आर्थिक संकट में फंस जाता है।"

50 प्रतिशत अनुदान की मांग

खेती में लगातार बढ़ती लागत को देखते हुए किसानों ने सरकार से मांग की है कि खाद, बीज, दवाइयों और अन्य कृषि सामग्री पर कम से कम 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाए अथवा उनकी कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए। किसानों का कहना है कि उनके आर्थिक अस्तित्व को बनाए रखने के लिए सरकार को तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए।

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