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चिमूर तहसील के पलसगांव वनपरिक्षेत्र में शुक्रवार, 16 अक्टूबर को 45 वर्षीय उषा अंकुश गुरुनुले की जान चली गई।
उषा अपने पति के साथ जंगल से सटे खेत में धान की फसल को पानी देने गई थीं, तभी बाघ ने उन पर हमला कर दिया।
घटना की जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
Chimur Tiger Attack Woman Death: चंद्रपुर जिले के चिमूर तहसील के ताडोबा-अंधारी बाघ परियोजना के बफर क्षेत्र अंतर्गत पलसगांव वनपरिक्षेत्र में शुक्रवार, 16 अक्टूबर को बाघ के हमले में एक महिला की मौत हो गई। मृतका की पहचान उषा अंकुश गुरुनुले (45) के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, घटना पलसगांव वनक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 559, पीएफ 1000 परिसर में हुई।
जानकारी के अनुसार, उषा गुरुनुले रात में सोयाबीन की कटाई का काम निपटाकर घर लौटी थीं। इसके बाद वह धान की फसल को पानी देने के लिए अपने पति अंकुश गुरुनुले के साथ जंगल से सटे खेत में गई थीं। उनके पति डीजल इंजन के पास पानी की व्यवस्था कर रहे थे, जबकि उषा खेत में खरपतवार निकाल रही थीं।
इसी दौरान घात लगाए बैठे बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया। बाघ उषा को पकड़कर पास के जंगल की ओर खींच ले गया। पत्नी पर हमला होते देख पति ने शोर मचाया, लेकिन बाघ के हमले में उषा की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी फैलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
जंगल से सटे खेतों में काम करने वाले किसानों और खेत मजदूरों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। घटना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पंचनामा किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। इस दौरान वनपरिक्षेत्र अधिकारी सागर बारसागड़े, वनपाल चंद्रकांत रासेकर और चिमूर पुलिस विभाग के कर्मचारी उपस्थित थे।
पलसगांव परिसर में बाघ के हमले की घटना से नागरिकों में भय का माहौल है। जंगल से सटे खेतों में काम करने वाले किसानों की सुरक्षा के लिए वन विभाग से गश्त बढ़ाने और आवश्यक एहतियाती उपाय करने की मांग क्षेत्र के नागरिकों ने की है।
तो वहीं देसाईगंज तहसील के अंतिम छोर पर स्थित बोलधा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आनेवाले रावणवाड़ी टोली क्षेत्र में बाघ और तेंदुओं की बढ़ती गतिविधियों से ग्रामीणों में भय का माहौल है। पिछले एक सप्ताह से हिंसक वन्यजीवों ने कई पालतू पशुओं पर हमला कर उन्हें मार डाला है। इससे किसानों और पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल ठोस उपाययोजना करने की मांग की है। रावणवाड़ी टोली के समीप डोंगरमेंढा और कसारी का जंगल क्षेत्र स्थित है। इस जंगल में बाघ और तेंदुओं के विचरण के चलते रात के समय ये हिंसक वन्यजीव गांव के आसपास पहुंचकर पालतू पशुओं को निशाना बना रहे हैं।