Mohan Bhagwat Buldhana Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि अच्छे कामों को प्रचारित करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि उनका प्रभाव समाज में दिखाई देता है और वही काम आगे बढ़ता रहता है।
उन्होंने कहा कि समाज परिवर्तन केवल भाषणों से नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच और प्रत्यक्ष कार्रवाई से संभव है। इसलिए समाज के लिए कुछ करने की इच्छा रखने वाले हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना चाहिए।
बुलढाणा (खामगांव) के पास सजनपुरी स्थित सूर्योदय पारधी आश्रमशाला परिसर में शनिवार को तीन आधुनिक खेल परिसरों और 10 हजार वर्ग फुट के बंद सभागार का उद्घाटन डॉ. भागवत ने किया। यह निर्माण श्री सद्गुरु दत्तधार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट, इंदौर और अमनोरा यस फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से किया गया है। कार्यक्रम में डॉ. भागवत ने कहा कि संवेदना का अर्थ केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि दूसरे की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझना है। सभी के उत्थान में ही हमारा वास्तविक उत्थान है।
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि अहंकार को दूर रखकर परोपकार की भावना विकसित करनी चाहिए। धार्मिक और परोपकारी आचरण से ही व्यक्ति को जीवन में वास्तविक संतोष मिलता है। उन्होंने स्वर्गीय भय्यूजी महाराज के समाजसेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके कार्यों से प्रेरणा लेकर सभी को अपनी क्षमता के अनुसार समाज के लिए योगदान देना चाहिए।
आदिवासी विकास मंत्री डॉ. अशोक उईके ने कहा कि पारधी और आदिवासी समाज के विकास के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और विभिन्न योजनाएं लागू की जा रही हैं। कामगार मंत्री आकाश फुंडकर ने आश्रमशाला में वंचित बच्चों के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
कार्यक्रम में डॉ. भागवत ने 16 पारधी आदिवासी छात्राओं को 10-10 हजार रुपये के चेक वितरित किए। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे आश्रमशाला के पूर्व विद्यार्थियों का सम्मान किया गया।