टाइगर रिजर्व विस्तार (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
भंडारा

184 गांवों पर 'बफर जोन' की तलवार! टाइगर रिजर्व के नाम पर रोजगार का 'शिकार', भंडारा में बड़ा खेला!

Navegaon Nagzira Tiger Reserve: वन्यजीव विभाग के नए फैसले से साकोली मुख्यालय गोंदिया स्थानांतरित। बफर जोन विस्तार से ग्रामीणों के रोजगार और अधिकारों पर संकट।

प्रिया जैस

Navegaon Nagzira Tiger Reserve Buffer Zone Expansion: नवेगांव–नागझिरा टाइगर रिज़र्व को लेकर 24 दिसंबर को जारी शासन निर्णय के बाद वन्यजीव विभाग विवादों में घिर गया है। एक ही टाइगर रिज़र्व के लिए दो अलग-अलग नियंत्रण अधिकारी, दो स्वतंत्र कार्यालय और उपसंचालक का मुख्यालय साकोली से गोंदिया स्थानांतरित करने का फैसला प्रशासनिक भ्रम और अव्यवस्था को जन्म दे रहा है।

वहीं बफर ज़ोन के विस्तार से किसान, खेत मजदूर और जंगल पर निर्भर नागरिकों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। उपसंचालक का मुख्यालय साकोली से गोंदिया में अब तक नवेगांव-नागझिरा, नागझिरा-कोका सहित संबंधित अभयारण्यों का प्रशासनिक नियंत्रण साकोली मुख्यालय से होता था। साकोली भौगोलिक दृष्टि से मध्यवर्ती स्थान पर है।

नए निर्णय के अनुसार टाइगर रिजर्व के उपसंचालक का मुख्यालय साकोली से गोंदिया स्थानांतरित किया जा रहा है। साकोली में केवल विभागीय वन अधिकारी का मुख्यालय रहेगा और नवेगांव अभयारण्य का नियंत्रण किया जाएगा। परिणामस्वरूप एक ही टाइगर रिज़र्व के लिए दो नियंत्रण अधिकारी और दो कार्यालय अस्तित्व में आ गए हैं, जिससे प्रशासनिक समन्वय पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

जिम्मेदारियों में अस्पष्टता व संभ्रम

नई व्यवस्था के तहत नागझिरा-कोका टाइगर रिजर्व का प्रशासन गोंदिया से, जबकि नवेगांवबांध अभयारण्य का संचालन साकोली से किया जाएगा। एकीकृत टाइगर रिज़र्व घोषित कर प्रशासनिक नियंत्रण को विभाजित रखने के पीछे क्या उद्देश्य है, यह बड़ा सवाल है। इससे निर्णय प्रक्रिया में देरी, जिम्मेदारियों में अस्पष्टता और क्षेत्रीय स्तर पर भ्रम की स्थिति पैदा होगी। दावा है कि बफर ज़ोन विस्तार के बाद मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने नए वनकर्मियों और अधिकारियों की नियुक्ति होगी।हकीकत है कि गोंदिया और भंडारा के प्रादेशिक वन विभाग में पहले से कार्यरत कर्मचारियों को ही स्थानांतरण के जरिए टाइगर रिज़र्व में समाहित किया जाएगा। यानी नई भर्ती की कोई प्रक्रिया नहीं होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होने के बजाय मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ ही पड़ेगा।

जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर बफर ज़ोन विस्तार

भंडारा और गोंदिया जिलों के 184 गांवों को नए सिरे से बफर ज़ोन में शामिल किया गया है।इस फैसले से पहले संबंधित गांवों के सरपंच, पं।स।व जि।प।सदस्य, स्थानीय विधायक और सांसदों को विश्वास में नहीं लिया गया। बफर ज़ोन घोषित करते समय तहसीलवार या गांववार स्पष्ट नक्शे और क्षेत्रफल सार्वजनिक न किए जाने से आम नागरिकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

बफर ज़ोन लागू होने के बाद कुआं खोदने, खेत-तालाब बनाने, नहरों व पगडंडियों की मरम्मत, श्मशानभूमि, खेल मैदान, पशु चराई, ईंट-भट्ठा व्यवसाय और वन-आधारित आजीविका के लिए वन एवं वन्यजीव विभाग की अनुमति आवश्यक होगी।

रोजगार छीनने का खतरा

बफर जोन विस्तार के कारण किसान, खेत मज़दूर और जंगल पर निर्भर कई परिवारों के रोजगार पर संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार नई संरचना रोजगार सृजन के बजाय समस्याएं बढ़ाने वाली साबित होगी। विधानसभा में विधायक नाना पटोले के सवाल उठाए जाने के बावजूद व्यापक चर्चा किए बिना अधिसूचना जारी किए जाने से असंतोष और बढ़ गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह पूरा मामला भंडारा जिले के महत्व को कम कर गोंदिया जिले को आगे बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है। स्थानीय नागरिकों ने नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिज़र्व के बफर ज़ोन विस्तार संबंधी निर्णय पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की है।

जनविरोधी निर्णय

नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व के नाम पर साकोली का मुख्यालय गोंदिया स्थानांतरित करना और बफर ज़ोन का विस्तार करना पूरी तरह जनविरोधी निर्णय है। प्रशासनिक सुविधा के लिए केंद्रीय स्थान होने के बावजूद साकोली को दरकिनार करना भंडारा जिले के महत्व पर सीधा हमला है। एक ही टाइगर रिज़र्व के लिए दो नियंत्रण अधिकारी नियुक्त कर प्रशासनिक अव्यवस्था पैदा की जा रही है।

  • सुनील फुंडे, अध्यक्ष, बीडीसीसी बैंक, भंडारा।

- नवभारत लाइव पर भंडारा से राजू खान की रिपोर्ट

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