Bharatiya Kisan Sangh Protest Bhandara: भारतीय किसान संघ विदर्भ प्रांत के आवाहन पर सोमवार को साकोली में किसानों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं और मांगों को लेकर एक किसान मोर्चा एवं धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। यह मोर्चा सुबह गजानन महाराज देवस्थान से प्रारंभ होकर दोपहर 1:30 बजे तहसील कार्यालय पहुंचा। इस प्रदर्शन में भंडारा, गोंदिया, गढ़चिरौली और चंद्रपुर जिलों से आए हजारों किसानों ने ट्रैक्टर, बैलगाड़ियों और बैंड-बाजे के साथ हिस्सा लेकर अपनी एकजुटता का जोरदार प्रदर्शन किया।
धान उत्पादक क्षेत्र होने के बावजूद उत्पादन लागत, बाजार भाव, बोनस, बिजली, सिंचाई और वन्यजीवों से होने वाले फसल नुकसान जैसी समस्याओं से जूझ रहे किसानों ने सरकार के खिलाफ पुरजोर आवाज बुलंद की। मोर्चे में भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष साई रेड्डी, अखिल भारतीय अधिकारी नाना आखरे, राहुल राठी, भंडारा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र पांडे, जिला मंत्री दिनेश कापगते, गोंदिया जिलाध्यक्ष डॉ. मंगेश बिसेन और बारबुद्धे सहित कई पदाधिकारी प्रमुखता से उपस्थित थे।
इसके अलावा विधायक नाना पटोले, पूर्व विधायक डॉ. हेमकृष्ण कापगते तथा सोमदत्त करंजेकर भी आम किसान के रूप में इस आंदोलन में शामिल हुए और किसानों की मांगों का समर्थन किया। आंदोलन के दौरान भारतीय किसान संघ ने शासन के समक्ष 18 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रस्तुत किया। इसमें मुख्य रूप से धान का वर्ष 2025-26 का बोनस तत्काल मंजूर किया जाए। धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3,500 रुपये प्रति क्विंटल तय कर बिक्री के 48 घंटे के भीतर भुगतान हो।
भंडारा और गोंदिया जिले में सीधे धान खरीद केंद्र शुरू किए जाएं। नियमित कर्ज चुकाने वाले किसानों को 2 लाख रुपये का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाए। कृषि कार्यों के लिए 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। गोसीखुर्द परियोजना का पानी स्थानीय साकोली, लाखनी और अर्जुनी क्षेत्र के खेतों को मिले। वन्यप्राणियों के हमले में मौत पर मुआवजा बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया जाए। वन्यजीवों से होने वाले नुकसान की शत-प्रतिशत भरपाई की जाए और अभयारण्य क्षेत्रों के चारों ओर सुरक्षा दीवार बनाई जाए।
तहसील कार्यालय पर उग्र प्रदर्शन के पश्चात भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों की जिलाधिकारी और भंडारा जिले के पालक मंत्री डॉ. पंकज भोयर से टेलीफोन पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान सहमति बनी कि आगामी शुक्रवार, 9 अक्टूबर को जिला कार्यालय में किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ एक विशेष बैठक आयोजित कर इन सभी मांगों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस ठोस आश्वासन के बाद दोपहर 3:30 बजे आंदोलन स्थगित हुआ। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शासन ने समयबद्ध तरीके से निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।