प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
भंडारा

अब इलेक्शन में जमकर खर्च कर सकेंगे उम्मीदवार, महाराष्ट्र चुनाव आयोग का बड़ा फैसला

Maharashtra Nikay Chunav: महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों के खर्च की सीमा करीब डेढ़ गुना बढ़ाई। अब प्रचार में अधिक खर्च की अनुमति दी।

आकाश मसने

Maharashtra Local Body Election Expense limit: महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने राज्य की आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा निर्णय लिया है। आयोग ने उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की सीमा में भारी बढ़ोतरी की है। पहले की तुलना में करीब डेढ़ गुना तक की वृद्धि किए जाने से उम्मीदवारों को अब अधिक आर्थिक राहत और प्रचार के लिए कानूनी रूप से अधिक अवसर मिलेंगे।

राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, बदलते समय, बढ़ती महंगाई और प्रचार खर्च की वास्तविकता को देखते हुए यह फैसला किया गया है। अब उम्मीदवारों को अपनी प्रचार रणनीति को और प्रभावी तरीके से संचालित करने में सहूलियत होगी।

कहां कितना खर्चा होगा

 ‘अ’ वर्ग नगर परिषद

नगरसेवक (पार्षद) उम्मीदवार: 5 लाख रुपए सीधे नगराध्यक्ष (प्रत्यक्ष रूप से चुने जाने वाले अध्यक्ष): 15 लाख रुपए

‘ब’ वर्ग नगर परिषद

नगरसेवक उम्मीदवार: 3.5 लाख रुपए नगराध्यक्ष उम्मीदवार: 11.25 लाख रुपए

‘क’ वर्ग नगर परिषद

नगरसेवक उम्मीदवार: 2.5 लाख रुपए नगराध्यक्ष उम्मीदवार: 7.5 लाख रुपए

नगर पंचायत

नगरसेवक उम्मीदवार: 2.25 लाख रुपए नगराध्यक्ष उम्मीदवार: 6 लाख रुपए

भंडारा की 4 नगर परिषदों में होंगे चुनाव

बता दें कि भंडारा जिले की 4 नगर परिषदों के चुनाव जल्द ही होने जा रहे है। इसमें भंडारा और तुमसर नगर परिषद ब वर्ग में आती है, जबकि साकोली और पवनी नगर परिषद क वर्ग में सम्मीलित है। पहले की तुलना में चुनाव का खर्च सीमा बढ़ जाने से संभावित उम्मीदवारों को अधिक खर्च करने में आसानी होगी। लिहाजा अनेक संभावित उम्मीदवारों में चुनावी खर्च को लेकर खुशी देखी जा रही है।

क्या है आयोग का उद्देश्य?

राज्य चुनाव आयोग का कहना है कि इस निर्णय से उम्मीदवारों को कानूनी दायरे में रहकर पारदर्शी और प्रभावी प्रचार करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, यह कदम चुनावी प्रक्रिया को अधिक नियमनबद्ध और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप बनाएगा।

नई संशोधित खर्च सीमा अब से सभी आगामी स्थानीय स्वराज संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया में लागू होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्णय से न केवल उम्मीदवारों को राहत मिलेगी, बल्कि इससे चुनाव खर्च की पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

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