प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया ) 
भंडारा

भंडारा में बदले सियासी समीकरण? पटोले-फुके मुलाकात चर्चा में, साकोली में नए संकेत

Bhandara Politics: भंडारा में नाना पटोले के सुकली निवास पर भाजपा नेताओं के साथ हुई ‘डाइनिंग टेबल’ चर्चा ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है।

अंकिता पटेल

Bhandara Sakoli Assembly: भंडारा साकोली विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक नाना पटोले के सुकली स्थित निवास पर हुई 'डाइनिंग टेबल' चर्चा ने जिले की राजनीति में भूचाल ला दिया है। लाखांदूर तहसील के कोच्छी दांडेगांव में आयोजित खेल प्रतियोगिता के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने राजनीतिक गलियारों में कानाफूसी तेज कर दी है।

कार्यक्रम के समापन के बाद भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं का सीधे नाना पटोले के निवास पर पहुंचकर भोजन करना, आग में घी डालने जैसा साबित हुआ है। कोच्छी दांडेगांव में खेल प्रतियोगिता का उद्घाटन समारोह आयोजित हुआ था।

इस अवसर पर जिला संरक्षक मंत्री डॉ. पंकज भोयर, विधान परिषद सदस्य डॉ. परिणय फुके, कांग्रेस विधायक नाना पटोले और सांसद डॉ. प्रशांत पाडोले की प्रमुख उपस्थिति रही। समारोह समाप्त होने के बाद जिला संरक्षक मंत्री डॉ. पंकज भोयर और विधायक डॉ. परिणय फुके का नाना पटोले के सुकली स्थित निवास पर जाकर भोजन करने की चर्चा जोरों पर है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में साकोली सीट पर नाना पटोले और डॉ. परिणय फुके के बीच तीखा संघर्ष हुआ था। उस चुनाव में डॉ। फुके द्वारा पटोले पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणियां अभी भी लोगों को याद हैं। ऐसे में कभी एक-दूसरे को आंखों की किरकिरी समझने वाले नेताओं का एक साथ नजर आना कई सवाल खड़े करता है।

पटोले की 'घर वापसी' की अटकलों को हवा

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, नाना पटोले और उनके कट्टर राजनीतिक विरोधी डॉ. परिणय फुके ने जिला संरक्षक मंत्री की सरकारी गाड़ी से एक साथ यात्रा की। यही नहीं, गाड़ी की पिछली सीट पर दोनों नेता साथ बैठे थे। इस दृश्य ने राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी और सोशल मीडिया पर नाना पटोले की 'घर वापसी' की अटकलों को हवा मिल गई।

कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह केवल शिष्टाचार था या आने वाले चुनावों की बिसात बिछाने की तैयारी, यह कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना तय है कि इस मुलाकात ने सियासी पारा चढ़ा दिया है।

कार्यकर्ताओं में भी असमंजस की स्थिति है और जिले की राजनीति में फिलहाल यही मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। कहा जा रहा है कि उस एक गाड़ी के सफर में कई राज दफन हैं। जिनसे पर्दा उठना अभी बाकी है।

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