Bhandara Miskin Tank Garden: कभी भंडारा शहर की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाला और नागरिकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा मिस्कीन टैंक गार्डन आज प्रशासनिक उपेक्षा, बढ़ते अतिक्रमण और भारी अव्यवस्था का शिकार होकर बदहाली के आंसू बहा रहा है। नियमित देखरेख और सुनियोजित विकास के अभाव में इस पूरे परिसर का स्वरूप बिगड़ चुका है। आलम यह है कि बारिश के मौसम में गार्डन स्थित ग्रीन जिम और नागरिकों के बैठने के लिए लगाई गई सामग्रियां पूरी तरह जलमग्न हो जाती है।
पिछले कई सालों से हर बारिश में जिम इलाका पानी में डूब जाता है, लेकिन प्रशासन ने कभी जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करने की जहमत नहीं उठाई। पानी में डूबे रहने के कारण ग्रीन जिम के अधिकतर उपकरण जंग खाकर खराब और नष्ट हो चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों को कसरत करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि मिस्कोन टैंक तालाब को विकसित कर यहां बोटिंग की सुविधा शुरू करने की योजना तत्कालीन अध्यक्ष स्व। बशीर पटेल ने बनाई थी। उनका उद्देश्य शहरवासियों को एक बेहतरीन पर्यटन व मनोरंजन स्थल उपलब्ध कराना था। यदि उस समय शुरू की गई पहल को गंभीरता से आगे बढ़ाया जाता, तो आज यह परिसर शहर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होता, लेकिन समय के साथ प्रशासनिक ढ़िलाई के कारण यह योजना अधर में लटक गई, मिस्कीन टैंक गार्डन के विकास और सौंदर्याकरण के नाम पर समय-समय पर योजनाएं बनाई गई और लाखों रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया। जानकारी के मुताबिक हाल के वर्षों में करीब 25 लाख रुपये की राशि सुरक्षा दीवार, गड्डू लगाने, गाद निकालने और योग हॉल बनाने पर खर्च की गई। बावजूद इसके जमीन पर कोई व्यापक सुधार या सौंदर्याकरण नजर नहीं आता।
शहरवासियों की मांग है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ मिलकर मिस्कीन टैंक गार्डन के विकास की ठोस कार्ययोजना तैयार करे, नियमित देखरेख और संरक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो शहर की पहचान से जुड़ा यह ऐतिहासिक तालाब धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो सकता है।
किसी समय मिस्कीन टैंक तालाब अपने आकर्षक अंडाकार स्वरूप के लिए जाना जाता था। हालांकि, आसपास के इलाकों में लगातार बढ़ते अतिक्रमण और प्रशासनिक अनदेखी के कारण इसका मूल ढांचा पूरी तरह प्रभावित हुआ है। आज स्थिति यह है कि यह तालाब अपने पुराने अंडाकार स्वरूप तो दूर, अर्धगोलाकार रूप में भी नजर नहीं आता।
तालाब की जमीन और उसके आसपास के क्षेत्र पर धीरे-धीरे अवैध कब्जे हो चुके हैं, जो इसके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नगर परिषद और जिला प्रशासन ने समय रहते तालाब की सीमाओं का आधिकारिक सर्वे कराकर अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए, तो शहर की यह ऐतिहासिक धरोहर जल्द ही इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।