साईगंगा धान मिल के प्रदूषण के खिलाफ ग्रामीणों का आमरण अनशन (सोर्स - फोटो नवभारत) 
भंडारा

भंडारा: पाऊनगांव में धान मिल के खिलाफ आमरण अनशन शुरू, प्रदूषण और दूषित पानी से ग्रामीण परेशान

Rice Mill Pollution Protest: पाऊनगांव में साईगंगा धान मिल के प्रदूषण के खिलाफ ग्रामीणों का आमरण अनशन शुरू। चिमनी की राख और दूषित पानी से फसलें बर्बाद हो रही हैं और मवेशी मर रहे हैं।

केतकी मोडक
Rice Mill Fly Ash Crop Damage In Bhandara: भंडारा जिले की लाखांदुर तहसील के तहत आने वाले पाऊनगांव में स्थित 'साईगंगा धान मिल' इन दिनों स्थानीय प्रशासन और प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण विवादों के घेरे में है।
मिल से लगातार फैल रहे जानलेवा वायु प्रदूषण, केमिकल युक्त दूषित पानी की अवैध निकासी और सड़कों पर उत्पन्न होने वाली गंभीर यातायात अव्यवस्था से तंग आकर आखिरकार ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया।
इसके विरोध में पाऊनगांव के नागरिकों ने गुरुवार से अनिश्चितकालीन हंगर स्ट्राईक शुरू कर दिया है। इस उग्र आंदोलन का नेतृत्व पाऊनगांव के प्रथम नागरिक (सरपंच) संदीप कोरे कर रहे हैं, जबकि सामाजिक कार्यकर्ता विनोद ढोरे ने भी आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।

चिमनी की राख से बढ़ रहीं सांस की बीमारियां

अनशन स्थल पर जुटे सैकड़ों ग्रामीणों ने धान मिल प्रबंधन पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि मिल की चिमनी से दिन-रात निकलने वाली बारीक धूल और परिसर में जमा किए गए राख के विशाल ढेरों के कारण पूरे गांव की हवा जहरीली हो चुकी है।
इस डस्ट प्रदूषण की वजह से पाऊन गांव के मासूम बच्चों और बुजुर्गों में दमा, एलर्जी और श्वसन (सांस) संबंधी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। इतना ही नहीं, यह काली राख हवा में उड़कर आस-पास के खेतों में खड़ी फसलों पर जम रही है, जिससे प्रफोटोसिंथेसिस रुकने से फसलों का उत्पादन बुरी तरह घट गया है और किसानों को भारी आर्थिक चपत लग रही है।

कई मवेशियों ने गंवाई जान

ग्रामीणों का दूसरा सबसे गंभीर आरोप मिल से निकलने वाले गंदे पानी को लेकर है। साईगंगा धान मिल प्रबंधन द्वारा बिना किसी ट्रीटमेंट के मिल का दूषित और बदबूदार पानी सीधे गांव की सार्वजनिक नालियों और प्राकृतिक जलस्रोतों में बहाया जा रहा है।
इस रासायनिक पानी को पीने के कारण पर्यावरण के साथ-साथ स्थानीय पशुधन भी खतरे में आ गया है। ग्रामीणों का दावा है कि इस जहरीले पानी के सेवन से पिछले कुछ समय में गांव के कई दुधारू मवेशियों (गायों और भैंसों) की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है, लेकिन शिकायत के बाद भी कोई सुनने वाला नहीं है।

सड़क पर भारी वाहनों का अवैध कब्जा

इसके अलावा, मिल में धान और चावल लाने-ले जाने वाले भारी-भरकम ट्रकों और हाइवा वाहनों के लिए प्रबंधन ने अपने परिसर के भीतर कोई पार्किंग व्यवस्था नहीं की है। नतीजा यह है कि ये विशाल वाहन मुख्य सड़क पर ही बेतरतीब ढंग से खड़े रहते हैं, जिससे पाऊनगांव की सड़कों पर दिनभर चक्काजाम की स्थिति बनी रहती है।
इस वजह से स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों, पैदल यात्रियों और एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को निकलने में भारी कठिनाई होती है, जिससे हर वक्त किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ा आक्रोश

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट रूप से अपनी मांगें प्रशासन के सामने रख दी हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि जब तक धान मिल प्रबंधन अपने परिसर में दूषित पानी के निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं करता, चिमनी पर आधुनिक धूल नियंत्रक उपकरण नहीं लगाता और भारी वाहनों के लिए अलग से निजी पार्किंग यार्ड उपलब्ध नहीं कराता, तब तक इस साईगंगा धान मिल का संचालन पूरी तरह से बंद रखा जाए।
बेहद निराशाजनक बात यह रही कि आंदोलन के पहले दिन भी स्थानीय राजस्व या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी अनशनकारियों की सुध लेने नहीं पहुंचा, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया है।
सरपंच संदीप कोरे और ग्रामीणों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जल्द ही इस मामले में दखल देकर मिल पर ताला नहीं लगाया या सुधार नहीं कराया, तो इस आमरण अनशन को पूरे लाखांदुर तहसील स्तर पर एक तीव्र चक्काजाम आंदोलन में बदल दिया जाएगा।

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