वैनगंगा पुल (सौजन्य-नवभारत) 
भंडारा

कागजों में बंद ये ब्रिटिशकालीन पुल, हकीकत में आज भी है चालू, भंडारा में बड़ी दुर्घटना का दे रहा न्यौता!

Bhandara Old Bridge: भंडारा में कागजों में बंद, हकीकत में चालू! वैनगंगा नदी का 90 साल पुराना पुल दे रहा हादसे को दावत। गोसेखुर्द बांध भरने से बढ़ा खतरा। पढ़ें प्रशासन की बड़ी लापरवाही।

प्रिया जैस

Bhandara News: भंडारा जिले के कारधा क्षेत्र में वैनगंगा नदी पर स्थित लगभग 90 वर्ष पुराना ब्रिटिशकालीन पुल प्रशासन के रिकॉर्ड में पिछले 10 वर्षों से बंद है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है। इस जर्जर और खतरनाक पुल से आज भी नागरिकों का आवागमन जारी है।

गोसीखुर्द परियोजना के जलस्तर के अंतिम स्तर तक पहुंचने से नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है, जिससे पुल पर संभावित हादसे का खतरा और गहरा गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

1929 में पुल का निर्माण

कारधा स्थित यह पुराना पुल वर्ष 1929 में अंग्रेजों द्वारा निर्मित किया गया था। समय के साथ इसकी आयु पूरी हो चुकी है और संरचनात्मक रूप से यह असुरक्षित घोषित किया जा चुका है। इसी कारण जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने वर्ष 2016 में इस पुल से सभी प्रकार की यातायात सेवाओं पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे।

लोहे के अवरोधक लगाकर पुल को बंद भी किया गया था, लेकिन राजनीतिक दबाव और स्थानीय स्तर पर ढिलाई के चलते यह निर्णय केवल कागजों तक सीमित रह गया। कई बार लोगों ने खुद ही अवरोधक हटाकर जोखिम भरे सफर की शुरुआत कर दी। वर्तमान में गोसीखुर्द परियोजना 245.500 मीटर की पूर्ण क्षमता से भर चुकी है।

बैक वॉटर बढ़ने से वैनगंगा नदी का पानी पुराने पुल की सतह तक पहुंच चुका है। इस स्थिति में किसी भी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन की ओर से पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है, इसलिए बाद में हाथ मलने के सिवा कुछ नहीं बचेगा।

दिनदहाड़े शुरू है पुल का उपयोग

पुल के समानांतर एक नया पुल पहले ही बना दिया गया है, जिस पर राष्ट्रीय राजमार्ग की भारी यातायात व्यवस्था संचालित हो रही है। इसके बावजूद लोग दिन दहाड़े और यहां तक की रात के अंधेरे में पुराने पुल का उपयोग कर रहे हैं। सात वर्ष पूर्व जिलाधिकारी द्वारा निषेध संबंधी सूचना बोर्ड भी लगाए गए थे, लेकिन उनका कोई असर दिखाई नहीं देता।

स्थिति यह है कि प्रशासन और नागरिक दोनों आंख मूंदे बैठे हैं और हादसे को दावत दी जा रही है। अब समय आ गया है कि प्रशासन सख्ती से यातायात बंद कराए और नागरिक भी जान जोखिम में डालने से बचें, क्योंकि जान है तो जहान है।

हेमंत कैबिनेट के 53 बड़े फैसले: 100 उत्कृष्ट स्कूल, 606 थानों में CCTV, मेडिकल कॉलेजों को करोड़ों की सौगात

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, महाराष्ट्र में समंदर के नीचे से पहाड़ों तक, एक साथ चल रहा काम

FREMAA Recruitment 2026: IT असिस्टेंट समेत 12 पदों पर भर्ती, 40,000 तक सैलरी; 6 सितंबर तक करें आवेदन

आंध्र प्रदेश में खौफनाक वारदात, श्रीशैलम के लॉज में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत; 3 दिन से बंद था कमरा

क्या राजनीति छोड़ रहे हैं नितिन गडकरी? संन्यास की अटकलों पर केंद्रीय मंत्री ने तोड़ी चुप्पी, जानिए पूरा सच