Beed Students: देशभर में मेडिकल प्रवेश के लिए आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर दिल्ली में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी एनटीए द्वारा जारी पुनर्परीक्षा के परिणामों ने छात्रों की परेशानी और बढ़ा दी है।
3 मई को आयोजित पहली परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद 29 जून को पुनर्परीक्षा कराई गई थी। इसके बाद 16 जुलाई को जारी परिणामों में कथित तौर पर एक नया तकनीकी विवाद सामने आया है। कई छात्रों का दावा है कि आधिकारिक आंसरकी के अनुसार उनके अंक काफी अधिक हैं, लेकिन स्कोर कार्ड में उन्हें बेहद कम अंक दिए गए हैं। छात्रों ने अब इस मामले को लेकर अदालत जाने की चेतावनी दी है।
बीड जिले के वडवणी की छात्रा ज्ञानेश्वरी पवार का मामला सामने आया है। ज्ञानेश्वरी ने मेडिकल प्रवेश के लिए दिनरात मेहनत की थी। वह रोजाना करीब 18 घंटे पढ़ाई करती थी और टॉप रैंक हासिल करने की उम्मीद में थी। पुनर्परीक्षा के बाद जब उसने आधिकारिक आंसरकी से अपने उत्तरों का मिलान किया तो उसके अनुसार उसे 720 में से 702 अंक मिलने चाहिए थे। वह दिल्ली के प्रतिष्ठित एम्स एम्स से मेडिकल शिक्षा हासिल करने का सपना देख रही थी।
लेकिन जब स्कोर कार्ड आया तो उसमें उसके सिर्फ 87 अंक दर्ज थे। इस परिणाम से छात्रा और उसके परिवार को बड़ा झटका लगा। ज्ञानेश्वरी की मां मीरा पवार ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी की गलत ओएमआर शीट जांची गई है। उन्होंने कहा कि हम पूरे सबूतों के साथ कह रहे हैं कि हमारी बेटी के साथ अन्याय हुआ है। एनटीए को सभी अभिभावकों को ओएमआर शीट दिखानी चाहिए।
बीड के ही छात्र सोहम नितीन गवते ने भी इसी तरह की शिकायत की है। सोहम ने बिना महंगी कोचिंग के अपनी मेहनत से तैयारी की थी। आंसरकी के अनुसार उसे 522 अंक मिलने की उम्मीद थी और उसे मेडिकल प्रवेश लगभग तय लग रहा था। लेकिन एनटीए द्वारा भेजे गए स्कोर कार्ड में उसके केवल 95 अंक दिखाए गए। नतीजे के बाद सोहम मानसिक रूप से परेशान है। उसके परिजनों ने अब इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यह केवल तकनीकी गलती है या फिर अंकों में बड़ी गड़बड़ी, इसकी जांच होनी चाहिए। आंसरकी और स्कोर कार्ड में सैकड़ों अंकों के अंतर ने एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीड के इन मामलों के बाद आशंका जताई जा रही है कि महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में भी कई छात्र इस तरह की परेशानी से गुजर रहे होंगे।
इस साल पुनर्परीक्षा में करीब 2.79 लाख छात्र अनुपस्थित रहे, जिसे नीट के इतिहास में सबसे बड़ी अनुपस्थिति बताया जा रहा है। छात्रों में बढ़ती निराशा को इसका कारण माना जा रहा है। एक अभिभावक ने कहा कि बच्चों ने खूनपसीना बहाकर पढ़ाई की। उत्तरों का मिलान करने के बाद हमें उम्मीद थी, लेकिन रिजल्ट ने सब कुछ बदल दिया। अगर यह तकनीकी गलती जल्द ठीक नहीं हुई तो हम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।