संतोष देशमुख व उनकी पत्नी अश्विनी देशमुख (सोर्स: सोशल मीडिया) 
बीड

मस्साजोग सरपंच उपचुनाव: संतोष देशमुख की पत्नी समेत 5 उम्मीदारों ने भरा पर्चा, क्या सहानुभूति बचा पाएगी विरासत?

Beed Political News: मस्साजोग में दिवंगत सरपंच संतोष देशमुख की मौत के बाद खाली हुई सीट पर घमासान शुरू हो गया है। अश्विनी देशमुख के खिलाफ 4 अन्य उम्मीदवारों ने ताल ठोक दी है।

आकाश मसने

Massajog Sarpanch By-election: महाराष्ट्र के बीड जिले के मस्साजोग गांव में राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। दिवंगत सरपंच संतोष देशमुख के निधन के बाद खाली हुए सरपंच पद के लिए उपचुनाव की प्रक्रिया अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। नामांकन के आखिरी दिन तक कुल 5 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की है, जिसने इस चुनाव को दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

अश्विनी देशमुख बनाम चुनावी चक्रव्यूह

इस उपचुनाव में सबसे पहला नामांकन दिवंगत सरपंच संतोष देखमुख की पत्नी अश्विनी संतोष देशमुख ने दाखिल किया था। गांव के एक वर्ग और देशमुख परिवार को उम्मीद थी कि यह चुनाव निर्विरोध होगा और अश्विनी देशमुख को अपने पति की विरासत संभालने का मौका मिलेगा। लेकिन, चुनावी समीकरण तब बदल गए जब पिछले चुनाव में मात्र 9 वोटों से हारने वाले स्वरूपानंद देशमुख ने फिर से मैदान में उतरने का फैसला किया।

दिग्गजों की एंट्री से बढ़ा तनाव

7 अप्रैल से शुरू हुई नामांकन प्रक्रिया के आखिरी दिन यानी 13 अप्रैल तक मैदान में पांच चेहरे सामने आ चुके हैं।

  • अश्विनी संतोष देशमुख
  • स्वरूपानंद देशमुख
  • संजीवनी देशमुख (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता)
  • पंजाब देशमुख
  • करुणा स्वरूपानंद देशमुख

सुरेश धस समेत इन नेताओं की थी निर्विरोध चुनाव की अपील

क्षेत्र के कद्दावर नेता और विधायक सुरेश धस समेत सांसद बजरंग सोनवणे ने भी सार्वजनिक रूप से इस चुनाव को निर्विरोध संपन्न कराने की अपील की थी। हालांकि, स्वरूपानंद देशमुख के कड़े रुख ने इन प्रयासों पर पानी फेर दिया है। स्वरूपानंद ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में चुनाव लड़ना सबका अधिकार है। उन्होंने अश्विनी देशमुख को सलाह देते हुए कहा कि "जब तक संतोष देशमुख की हत्या के मामले में न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें राजनीति से दूर रहकर न्याय की लड़ाई लड़नी चाहिए।"

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजरें 15 अप्रैल पर टिकी हैं, जब नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद 17 अप्रैल को नाम वापसी की अंतिम तिथि है। यदि 17 अप्रैल तक अन्य उम्मीदवार अपना नाम वापस नहीं लेते हैं, तो यह मुकाबला बहुकोणीय हो जाएगा। क्या राजनीतिक सुलह के जरिए इसे निर्विरोध बनाया जाएगा या मतदान के जरिए जनता अपना फैसला सुनाएगी, यह देखना अहम होगा।

क्या है संतोष देशमुख हत्याकांड ?

बीड जिले के मस्साजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की 9 दिसंबर 2024 को बेरहमी से हत्या कर दी गई। एक ऊर्जा कंपनी से जबरन वसूली की कोशिशों को रोकने के बाद उन्हें अगवा किया गया और यातनाएं देकर उन्हें मार डाला गया और बाद में उनके शव को फेंक दिया गया। इस मामले में 6 लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिसमें पूर्व मंत्री धनंजय मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मीकि कराड भी शामिल हैं। इस हत्याकांड के बाद धनंजय मुंडे को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

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