Maratha Activist Ramchandra Jamdade Death Beed: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से जालना के अंतरवाली सराटी में चल रहा आंदोलन समाप्त होने के बाद जहां एक तरफ शांति का माहौल था, वहीं दूसरी तरफ इस हादसे ने समाज को गहरा जख्म दे दिया है। आंदोलन के मुख्य चेहरा मनोज जरांगे पाटिल द्वारा अपना अनशन वापस लिए जाने के बाद तमाम जिलों से आए प्रदर्शनकारी और कार्यकर्ता अपने-अपने गांवों की ओर प्रस्थान कर रहे थे। इसी क्रम में पुणे जिले के इंदापुर के रहने वाले कार्यकर्ता भी कार से अपनी वापसी यात्रा पर थे।
रात के घने अंधेरे में बीड-अहमदनगर हाईवे पर मांजरसुंबा के पास अचानक उनकी कार अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे खड़े एक भारी ट्रक के पिछले हिस्से में जा घुसी। टक्कर इतनी भयानक और भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। वाहन के भीतर मौजूद लोगों को बाहर निकालने के लिए स्थानीय प्रशासन और राहगीरों को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
इस दर्दनाक सड़क हादसे में इंदापुर निवासी रामचंद्र शंकर जमदाड़े की शरीर में आई गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मौके पर ही मौत हो गई। वहीं कार में उनके साथ सफर कर रहे अन्य दो साथी, संतोष माने और बिपिन मोरे भी इस घटना में गंभीर रूप से चोटिल हुए हैं। दोनों घायलों को तत्काल बीड के एक निजी अस्पताल में आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की विशेष टीम उनकी जान बचाने की हरसंभव कोशिश कर रही है।
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हादसे की भयंकर गूंज जैसे ही स्थानीय स्तर पर फैली, मराठा समाज के बीड और आस-पास के स्थानीय समन्वयक और पदाधिकारी आधी रात को ही सीधे अस्पताल और दुर्घटना स्थल पर पहुंच गए। आंदोलनकारियों के प्रति एकजुटता दिखाते हुए समन्वयकों ने घायलों को त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित कराई। इसके साथ ही, समाज के प्रतिनिधियों ने अस्पताल में भर्ती संतोष माने और बिपिन मोरे के इलाज की पूरी वित्तीय जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है।
इस अचानक आई विपत्ति के बाद मृतक रामचंद्र जमदाड़े के पैतृक गांव इंदापुर में चूल्हे नहीं जले हैं और हर आंख नम है। मराठा समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री और राज्य प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। समाज ने सरकार के समक्ष मांग रखी है कि आंदोलन के लिए समर्पित रहने वाले इस कार्यकर्ता के परिवार को अविलंब उचित आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और परिवार को संबल देने के लिए किसी एक आश्रित सदस्य को सरकारी सेवा में नियुक्त किया जाए।