छत्रपति संभाजीनगर मनपा (सोर्स: सोशल मीडिया) 
औरंगाबाद

छत्रपति संभाजीनगर में कचरा प्रबंधन पर मंडराया संकट! बढ़ते खर्च और अतिरिक्त मानवबल से पस्त हुई एजेंसी

Sambhajinagar Garbage Crisis: छत्रपति संभाजीनगर में कचरा संकलन एजेंसी पर गहराया आर्थिक संकट। अतिरिक्त कर्मचारियों के वेतन और वाहनों के बढ़ते खर्च से वित्तीय भार बढ़ा, व्यवस्था प्रभावित।

गोरक्ष पोफली

Waste Management Crisis Chhatrapati Sambhajinagar: छत्रपति संभाजीनगर शहर की स्वच्छता व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की जिम्मेदारी निभा रही निजी कचरा संकलन एजेंसी इन दिनों गंभीर आर्थिक दबाव से जूझ रही है। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी की कार्ययोजना सीमित संसाधनों और निर्धारित मानवबल के आधार पर तैयार की गई थी, लेकिन परिस्थितियां बदलने से संचालन लागत लगातार बढ़ती चली गई।

अतिरिक्त कर्मचारियों का वेतन, नए वाहनों का खर्च और अन्य परिचालन व्यय मिलाकर हर महीने करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो एजेंसी के लिए मौजूदा व्यवस्था को उसी स्वरूप में जारी रखना कठिन हो सकता है।

योजना से अधिक बढ़ा मानवबल

जानकारी के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर में नई एजेंसी ने कार्यभार संभालने के बाद पहले से कार्यरत कर्मचारियों को समायोजित किया और आवश्यकता के अनुसार नई नियुक्तियां भी कीं। इसके बाद विभिन्न स्तरों से लगातार नए लोगों को रोजगार देने की मांग बढ़ती गई। परिणामस्वरूप कर्मचारियों की संख्या निर्धारित सीमा से काफी अधिक हो गई। न्यूनतम वेतन के नियमों के कारण सभी कर्मचारियों का वेतन भुगतान करना अनिवार्य है, जिससे मासिक व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

वाहनों के खर्च ने बढ़ाया दबाव

कचरा संकलन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से एजेंसी ने 525 नए वाहन सेवा में उतारे हैं। इन वाहनों की ऋण किश्त, ईंधन, मरम्मत और नियमित रखरखाव पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। वेतन और वाहन संचालन का संयुक्त खर्च एजेंसी के लिए आर्थिक चुनौती बन गया है। सूत्रों का दावा है कि केवल अतिरिक्त व्यय के कारण हर महीने लगभग दो करोड़ रुपये का भार पड़ रहा है।

नई नियुक्तियों की मांग बनी चिंता

सूत्र बताते हैं कि अभी भी करीब 100 और लोगों को नियुक्त करने की मांग की जा रही है। इनमें पर्यवेक्षक स्तर के पद भी शामिल हैं। एजेंसी का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में और भर्ती करना व्यावहारिक नहीं है। यदि लगातार दबाव बना रहा तो कंपनी अपने अनुबंध की समीक्षा करने या आगे की रणनीति बदलने पर विचार कर सकती है।

महापौर ने जांच का दिया भरोसा

महापौर समीर राजूरकर ने कहा कि कचरा प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। यदि किसी स्तर पर अनियमितता या अनुबंध की शर्तों से जुड़ा कोई मुद्दा सामने आता है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था बाधित न हो, इसके लिए महानगरपालिका हर आवश्यक कदम उठाएगी।

– नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट

अब नहीं जाएंगे जंतर-मंतर...रिहाई के लिए सौरव दास और आशुतोष रांका ने क्या-क्या वादे किए?

अजेय रणनीतिकार: चुनावी रिकॉर्ड से लेकर बूथ मैनेजमेंट तक, कैसे काम करती है अमित शाह की रणनीति?

Amit Shah Nickname: बचपन में अमित शाह को किस नाम से बुलाते थे? पढ़ें दिलचस्प किस्सा

एपस्टीन के साथ हरदीप पुरी की नई फोटो रिलीज, राहुल गांधी ने पूछा- किस गद्दार को ब्लैकमेल कर रहे हैं?

India Chem 2026: बॉम्बे एग्जीबिशन सेंटर में होगा भव्य आयोजन, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा करेंगे उद्घाटन