Samruddhi Mahamarg Development Centers: समृद्धि महामार्ग के कारण पहले से औद्योगिक और निवेश के केंद्र के रूप में उभर रहे छत्रपति संभाजीनगर जिले को राज्य सरकार ने एक और बड़ी सौगात दी है। राज्य मंत्रिमंडल ने समृद्धि महामार्ग के किनारे प्रस्तावित 16 विकास केंद्रों के नियोजन के लिए महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (MSRDC) को विशेष नियोजन प्राधिकरण (SPA) नियुक्त करने का निर्णय लिया है। इसका सबसे अधिक लाभ छत्रपति संभाजीनगर जिले को मिलने वाला है, क्योंकि राज्य के 16 विकास केंद्रों में सर्वाधिक चार केंद्र इसी जिले में प्रस्तावित किए गए हैं। इन चार केंद्रों के अंतर्गत जिले के 42 गांवों का नियोजित विकास किया जाएगा।
इस निर्णय के बाद छत्रपति संभाजीनगर जिले में अनियोजित विस्तार की बजाय वैज्ञानिक और सुनियोजित विकास की दिशा तय होगी। आवासीय क्षेत्र, औद्योगिक परिसर, व्यावसायिक गतिविधियां, लॉजिस्टिक पार्क, सड़क नेटवर्क, हरित क्षेत्र, सामाजिक सुविधाएं और सार्वजनिक अधोसंरचना को एकीकृत योजना के तहत विकसित किया जाएगा। खास बात यह है कि किसी भी किसान की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा और न ही लैंड पूलिंग लागू होगी।
छत्रपति संभाजीनगर जिले में चार इंटरचेंज क्षेत्रों को विकास केंद्र के रूप में चुना गया है।
इन सभी केंद्रों को मिलाकर जिले के 42 गांव विकास योजना का हिस्सा बनेंगे। राज्य के किसी भी अन्य जिले में इतने अधिक विकास केंद्र प्रस्तावित नहीं हैं, इसलिए यह योजना छत्रपति संभाजीनगर के लिए विशेष महत्व रखती है।
छत्रपति संभाजीनगर पहले से ही औरिक औद्योगिक नगर, शेंद्रा-बिडकीन औद्योगिक क्षेत्र, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (डीएमआईसी) तथा समृद्धि महामार्ग जैसे बड़े विकास प्रकल्पों का केंद्र है। अब चार नए विकास केंद्रों के नियोजन से इन सभी परियोजनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जिले में नए उद्योगों की स्थापना, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक पार्क, परिवहन सुविधाओं और सेवा क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना बढ़ेगी। साथ ही हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना में किसानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। पहले लैंड पूलिंग के माध्यम से नए शहर बसाने की योजना थी, लेकिन किसानों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के कारण वह योजना आगे नहीं बढ़ सकी।
अब एमएसआरडीसी केवल नियोजन एजेंसी के रूप में कार्य करेगी। गांवों की मौजूदा स्थिति, भूमि उपयोग, जनसंख्या वृद्धि और भविष्य की जरूरतों का अध्ययन कर विकास आराखड़ा तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर सड़कें, सार्वजनिक सुविधाएं, औद्योगिक क्षेत्र, आवासीय क्षेत्र, हरित पट्टी और अन्य आधारभूत सुविधाओं का नियोजन होगा।
MSRDC सबसे पहले प्रत्येक विकास केंद्र का विस्तृत सर्वेक्षण करेगी। मौजूदा भूमि उपयोग का अध्ययन करने के बाद भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजना बनाई जाएगी। अंतिम आराखड़ा तैयार करने से पहले स्थानीय स्वशासी संस्थाओं, ग्राम पंचायतों और नागरिकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। पूरी प्रक्रिया लगभग दो वर्षों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
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हालांकि जिले के चार प्रस्तावित विकास केंद्रों में से दो क्षेत्र पहले से छत्रपति संभाजीनगर महानगर प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इन क्षेत्रों के विकास आराखड़े पर महानगर प्राधिकरण पहले से काम कर रहा है। ऐसे में अब एमएसआरडीसी इन क्षेत्रों के लिए अलग योजना तैयार करेगी या दोनों संस्थाओं के बीच जिम्मेदारियों का समन्वय किया जाएगा, इस पर अभी सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समृद्धि महामार्ग के दोनों ओर नियोजित विकास से छत्रपति संभाजीनगर केवल मराठवाड़ा ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र के प्रमुख औद्योगिक, व्यापारिक और लॉजिस्टिक केंद्र के रूप में और अधिक मजबूत होगा। यदि विकास योजनाएं तय समय पर लागू होती हैं तो जिले में आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार होगा, निजी निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का भी संतुलित एवं सुनियोजित विकास सुनिश्चित हो सकेगा।
- नवभारत लाइव के लिए छत्रपति संभाजीनगर से शफीउल्ला हुसैनी की रिपोर्ट