महाराष्ट्र में नए आपराधिक कानून के तहत पहला मामला दर्ज (फाइल फोटो) 
औरंगाबाद

महाराष्ट्र में नए आपराधिक कानून के तहत पहला मामला दर्ज, जानें क्या है केस?

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में नई धारा के मुताबिक मामले दर्ज किया गया है। यह मामला सिडको पुलिस थाने में धारा 64 के अनुसार दर्ज किया गया है, जो पहले धारा 376 के नाम से जानी जाती थी। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने भी कमला मार्केट इलाके में एक रेहड़ी-पटरी वाले के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत पहली प्राथमिकी दर्ज की।

किर्तेश ढोबले

मुंबईः देश में सोमवार से नए तीन अपराधिक कानून लागू हो गए है, जिससे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में दूरगामी बदलाव आएंगे। इस बीच, बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में नई धारा के मुताबिक मामला दर्ज किया गया है। यह मामला सिडको पुलिस थाने में दर्ज किया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, यह मामला नए कानून के अनुसार धारा 64 के अनुसार दर्ज किया गया है, जो पहले धारा 376 के नाम से जानी जाती थी। यह घटना शहर के एकता नगर में हुई। जहां दूध लेने गई महिला से अज्ञात व्यक्ति ने मारपीट की। जिसके खिलाफ यह नए कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है।

महाराष्ट्र पुलिस नए कानून को लेकर पूरी तैयार

महाराष्ट्र पुलिस नए कानून को लागू करने को लेकर पूरी तैयार है। पुलिस हेडक्वार्टर ने पुलिस अधिकारियों को पुराने कानूनों से नए कानूनों में परिवर्तन में मदद के लिए एक सूचना पुस्तिका दी है। इसके साथ ही पुलिस को एक एसओपी (संचालन मानक प्रक्रिया) जारी की है। इसमें क्राइम, महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध , संपत्ति अपराध, आर्थिक अपराध, संगठित अपराध , आतंकवादी कृत्य और दुर्घटनाओं से कैसे निपटना है, इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है।

डीजीपी रश्मि शुक्ला ने क्या कहा?

बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र की डीजीपी रश्मि शुक्ला ने 95 पन्नों की पुस्तिका के स्वागत नोट में पुलिसकर्मियों को इस पुस्तक का उपयोग करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के रूप में सिस्टम का बेहतरीन डेटाबेस तैयार किया गया है। इसकी मदद से केस दर्ज करते समय धाराओं और जांच को लेकर होने वाली उलझन से आसानी से बचा जाएगा।

पूरे देश में प्रभावी हो गए ये नए कानून

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 आज से पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं। इन तीनों कानून ने ब्रिटिश कालीन कानूनों क्रमश: भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है।

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