Fire Brigade Loophole Sambhaji Nagar: शहर की ऊंची इमारतों में अग्नि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महानगरपालिका द्वारा किए जा रहे करोड़ों के निवेश पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थायी समिति की बैठक में वंचित बहुजन आघाड़ी के नगरसेवक अमित भुईगल ने प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर करते हुए बताया कि करोड़ों रुपये की लागत से खरीदा गया अत्याधुनिक 'वाटर टावर' केवल आग बुझा सकता है, लेकिन उसमें फंसे नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोई व्यवस्था नहीं है।
संभाजीनगर नगरपालिका ने जिला योजना समिति की निधि से लगभग 15.78 करोड़ रुपये खर्च कर 36 मीटर की ऊंचाई तक कार्य करने वाला 'मल्टी आर्टिक्युलेटिंग वाटर टावर' खरीदा है। प्रशासन का दावा है कि इस तकनीक से 12वीं मंजिल तक लगी आग पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकेगा। हालांकि, नगरसेवक अमित भुईगल ने बैठक में यह मुद्दा उठाया कि आग बुझाना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण इमारतों में फंसे लोगों की जान बचाना भी है। इस उपकरण में बचाव (रेस्क्यू) के लिए कोई अलग तंत्र उपलब्ध न होने से आपातकालीन स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
इस खुलासे के बाद यांत्रिकी विभाग के अभियंता अमोल कुलकर्णी ने स्पष्ट किया कि बचाव कार्य की कमी को दूर करने के लिए अब अलग से रेस्क्यू वाहन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। लगभग 7 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से यह वाहन खरीदा जाएगा, जिसका प्रस्ताव जल्द ही मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। बैठक में यह चर्चा का विषय रहा कि केवल उपकरण खरीद लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक समग्र (Integrated) व्यवस्था होना अनिवार्य है।
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अमित भुईगल ने प्रशासन से कड़े सवाल पूछे कि क्या अग्निशमन उपकरणों की खरीद के दौरान उपयोगिता और सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई? बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि भविष्य में किसी भी उपकरण की खरीद करते समय आग बुझाने और बचाव दोनों ही तंत्रों का होना आवश्यक है। प्रशासन से अब यह अपेक्षा की जा रही है कि वे ऊँची इमारतों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस नए रेस्क्यू वाहन के प्रस्ताव को बिना किसी देरी के अमलीजामा पहनाएंगे।